रूस की अंतरिक्ष रणनीति: अमेरिकी सेना ने चेताया संभावित हमले का खतरा
रूस के संभावित अंतरिक्ष हमले की चेतावनी
नई दिल्ली: अमेरिकी सेना के एक उच्च-ranking अधिकारी ने चेतावनी दी है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अंतरिक्ष में एक बड़ा हमला करने की योजना बना सकते हैं, जो 1941 के पर्ल हार्बर हमले की तरह अचानक हो सकता है। अमेरिकी स्पेस कमांड के प्रमुख जनरल स्टीफन व्हाइटिंग के अनुसार, रूस अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तैनात करने पर विचार कर रहा है। यदि ऐसा हुआ, तो पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद सैटेलाइट्स के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इससे संचार, जीपीएस, मौसम पूर्वानुमान और सैन्य संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं।
ब्रिटेन के एक प्रमुख समाचार पत्र को दिए गए इंटरव्यू में जनरल व्हाइटिंग ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन इस संभावित खतरे को लेकर गंभीर चिंताओं में है। उन्होंने बताया कि रूस एक परमाणु एंटी-सैटेलाइट हथियार विकसित कर रहा है, जो अंतरिक्ष में कई देशों के सैटेलाइट्स को एक साथ नुकसान पहुंचा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस तरह की कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेगा। उनका कहना है कि रूस पारंपरिक सैन्य शक्ति में अमेरिका और नाटो से खुद को कमजोर मानता है, इसलिए वह अंतरिक्ष को नए युद्धक्षेत्र के रूप में विकसित कर रहा है। यदि रूस अंतरिक्ष में परमाणु हथियार तैनात करता है, तो यह 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी का उल्लंघन होगा, जिस पर रूस भी हस्ताक्षर कर चुका है। इस संधि का उद्देश्य अंतरिक्ष को शांतिपूर्ण बनाए रखना है।
जनरल व्हाइटिंग ने यह नहीं बताया कि अमेरिका को इस योजना की जानकारी कैसे मिली, लेकिन उन्होंने कहा कि इसे बेहद गंभीरता से लिया जा रहा है। इस बीच, रूस पर सैटेलाइट संचार और जीपीएस सिग्नल को जाम करने के प्रयासों का भी आरोप है। यह गतिविधियां इतनी व्यापक हैं कि नागरिक उड्डयन भी प्रभावित हो सकता है। इससे स्पष्ट है कि रूस पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ अंतरिक्ष को भी रणनीतिक मोर्चा बना रहा है। यूरोपीय देशों में भी इस खतरे को लेकर चिंता बढ़ रही है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश और उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। वहीं, नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने कहा कि मजबूत यूरोप ही मजबूत नाटो की नींव है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए अधिक जिम्मेदारी उठानी चाहिए, ताकि अमेरिका चीन जैसे अन्य वैश्विक चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित कर सके। नाटो के आगामी सम्मेलन में हथियार उत्पादन और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है। यूरोप अब धीरे-धीरे यह समझ रहा है कि उसे अपनी रक्षा क्षमता को स्वतंत्र रूप से मजबूत करना होगा। कुल मिलाकर, रूस की संभावित अंतरिक्ष रणनीति ने वैश्विक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। यदि यह खतरा वास्तविकता में बदलता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की संचार और तकनीकी प्रणालियों पर पड़ सकता है।
