रूस की नई रणनीति: ईरान को ड्रोन तकनीक से लैस करने की तैयारी
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, रूस ने ईरान को अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक प्रदान करने की योजना बनाई है। इस नई रणनीति के तहत, ईरान को 5000 फाइबर ऑप्टिक ड्रोन दिए जा रहे हैं, जो किसी भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम द्वारा ट्रैक नहीं किए जा सकते। रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस केवल हथियार नहीं दे रहा, बल्कि ईरान की पूरी ड्रोन आर्मी तैयार करने में जुटा है। इस स्थिति ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है, खासकर अमेरिका के लिए। क्या यह नई तकनीक अमेरिका के लिए एक गंभीर चुनौती बनेगी? जानें पूरी कहानी।
| May 9, 2026, 13:26 IST
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
बीती रात समुद्र में अमेरिका और ईरान के बीच हुई झड़प ने वैश्विक स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की आशंका को फिर से जगा दिया है। इस संघर्ष में रूस की भागीदारी को सबसे बड़ा और खतरनाक मोड़ माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के लिए एक ऐसा रूसी चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसे तोड़ना अमेरिका जैसी महाशक्ति के लिए भी चुनौतीपूर्ण होगा। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट ने इस विषय पर हलचल मचा दी है। इसमें कहा गया है कि रूस की खुफिया एजेंसी जीआरयू ने ईरान के लिए एक गुप्त मास्टर प्लान बनाया है। इस योजना के तहत तेहरान को 5000 फाइबर ऑप्टिक ड्रोन दिए जा रहे हैं, जिन्हें कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम ट्रैक नहीं कर सकेगा। इसका मतलब है कि युद्ध अब केवल मिसाइलों और जहाजों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह तकनीकी लड़ाई में बदल चुका है, जहां दुश्मन को हमले का पता नहीं चलेगा।
ड्रोन तकनीक की नई दिशा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये ड्रोन किसी रेडियो सिग्नल पर निर्भर नहीं करते, बल्कि इन्हें एक पतली फाइबर ऑप्टिक केबल के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है। इसका सीधा अर्थ है कि अमेरिका के सबसे महंगे जैमर्स भी इन्हें रोकने में असमर्थ होंगे। इन ड्रोन में ऑपरेटर को स्पष्ट लाइव वीडियो मिलता है, जिससे वह 40 किमी दूर बैठे दुश्मन पर सटीक हमला कर सकता है। इसके अलावा, रूस ईरान को लंबी दूरी के सेटेलाइट ड्रोन देने की योजना भी बना रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन ड्रोन में स्टार्लिंग टर्मिनल्स का उपयोग किया जा सकता है, जो एलन मस्क की कंपनी द्वारा संचालित होते हैं।
ईरान की ड्रोन आर्मी का निर्माण
रिपोर्ट के अनुसार, रूस केवल हथियार नहीं दे रहा, बल्कि ईरान की पूरी ड्रोन आर्मी तैयार करने में जुटा हुआ है। इसके लिए तीन स्तर का सुरक्षा नेटवर्क बनाया जा रहा है। पहले स्तर में रूस की यूनिवर्सिटीज में पढ़ रहे लगभग 10,000 ईरानी छात्रों को ड्रोन ऑपरेशंस की ट्रेनिंग दी जाएगी। दूसरे स्तर में ताजिक लोगों को शामिल किया जाएगा, जो रूसी और फारसी दोनों भाषाएं समझते हैं। तीसरे स्तर में सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के वफादार लड़ाकों को जोड़ा जाएगा। यह योजना तब तेज हुई जब खबर आई कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के महत्वपूर्ण तेल केंद्र खारग द्वीप पर कब्जे की तैयारी कर रहा था।
सऊदी अरब की नई भूमिका
हाल ही में सऊदी अरब ने अमेरिकी फोर्सेस को अपने एयरबेस और एयर स्पेस का उपयोग करने की अनुमति दी है, जो कि ईरान, अमेरिका और इसराइल के बीच बढ़ते तनाव के बीच महत्वपूर्ण है। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले सऊदी ने ईरान के खिलाफ किसी भी कार्रवाई के लिए अपने एयरबेस देने से मना कर दिया था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अचानक बदलाव सऊदी अरब की रणनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है।
