लेबनान और इजरायल के बीच 33 साल बाद शुरू हुई सीधी बातचीत: क्या है इसके पीछे का कारण?
नई दिल्ली में महत्वपूर्ण वार्ता
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, लेबनान और इजरायल ने 33 वर्षों के बाद सीधी बातचीत की शुरुआत की है। यह महत्वपूर्ण बैठक मंगलवार को वाशिंगटन में आयोजित की गई, जिसे एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। दोनों पक्षों ने संवाद को सकारात्मक बताया, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
उच्च-स्तरीय वार्ता का महत्व
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका की मेज़बानी में आयोजित इस त्रिपक्षीय बैठक को 1993 के बाद की पहली उच्च-स्तरीय बातचीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भविष्य में संवाद की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।
लेबनान का मानवीय संकट पर ध्यान
बैठक में लेबनान की राजदूत नादा हमादेह मोवाद ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि अगले दौर की वार्ता की जानकारी समय पर साझा की जाएगी। उन्होंने मौजूदा संघर्ष के कारण उत्पन्न मानवीय संकट को तुरंत संबोधित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
मोवाद ने कहा, "मैंने युद्धविराम और विस्थापित लोगों को उनके घरों में लौटने का आह्वान किया।" उन्होंने लेबनान में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न गंभीर मानवीय संकट को कम करने के लिए व्यावहारिक उपायों की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
लेबनान की सुरक्षा और संप्रभुता
मोवाद ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने "नवंबर 2024 की शत्रुता समाप्ति की घोषणा के पूर्ण कार्यान्वयन की तत्काल आवश्यकता की पुष्टि की है"। उन्होंने अमेरिका का आभार भी व्यक्त किया।
बैठक के दौरान, लेबनान ने इजरायली सेना और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम की मांग को दोहराया, जिसे वार्ता की प्राथमिकता बताया गया।
इजरायल का सुरक्षा पर जोर
इजरायल के राजदूत येचिएल लीटर ने इस बातचीत को "दो घंटे का शानदार आदान-प्रदान" बताया। हालांकि, उन्होंने दक्षिणी लेबनान में युद्धविराम के मुद्दे पर कोई सीधा उत्तर नहीं दिया।
लीटर ने कहा, "जहां तक युद्धविराम का सवाल है, हम केवल एक ही चीज से निपट रहे हैं, और मैंने इसे बहुत स्पष्ट कर दिया है, हम इजरायल राज्य के निवासियों की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"
क्षेत्रीय तनाव के बीच वार्ता
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है। एक सप्ताह पहले अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच हुए नाजुक युद्धविराम समझौते के बाद यह संवाद शुरू हुआ है।
रिपोर्टों के अनुसार, इज़राइल इस प्रक्रिया में हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और लेबनान के साथ संभावित शांति समझौते पर ध्यान केंद्रित कर सकता है।
