लेबनान पर इजरायल के हमले: संघर्ष की जड़ें और वर्तमान स्थिति
सीजफायर के बावजूद जारी हमले
जब ईरान और इजरायल के बीच संघर्ष में सीजफायर की घोषणा हुई, तो उम्मीद थी कि स्थिति सामान्य हो जाएगी। लेकिन इसके बाद भी इजरायल ने लेबनान पर हमले जारी रखे हैं। अब यह विवाद लेबनान के चारों ओर घूम रहा है। ईरान का कहना है कि समझौते में यह तय हुआ था कि लेबनान पर कोई हमला नहीं होगा, जबकि अमेरिका और इजरायल का कहना है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ था। दोनों पक्षों की अलग-अलग दलीलें हैं और इजरायल के हमले जारी हैं, जिसमें लेबनान के सैकड़ों नागरिकों की जान जा चुकी है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि वह हिजबुल्लाह को समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
लेबनान पर इजरायल का ध्यान क्यों?
यदि आप मानचित्र पर देखें, तो इजरायल और लेबनान भूमध्य सागर के पूर्वी किनारे पर स्थित हैं। लेबनान उत्तर में और इजरायल दक्षिण में है, जिससे दोनों देशों की सीमाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। लेबनान की सीमा तीन तरफ से सीरिया से भी लगती है। इजरायल की मुख्य चिंता हिजबुल्लाह है, जो लेबनान में एक प्रमुख शिया मुस्लिम राजनीतिक समूह है। इसे ईरान का प्रॉक्सी संगठन माना जाता है, और यही कारण है कि ईरान इसे समर्थन दे रहा है जबकि इजरायल इसे समाप्त करने की कोशिश कर रहा है।
हिजबुल्लाह और इजरायल का संघर्ष
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष दशकों से चल रहा है। हमास की तरह, इजरायल भी हिजबुल्लाह को अपना दुश्मन मानता है। 7 अक्टूबर 2023 को जब हमास ने इजरायल पर हमला किया, तब हिजबुल्लाह ने उसका समर्थन किया, जिसके बाद से इजरायल ने इस संगठन के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी। नवंबर 2024 में इजरायल ने एक सीजफायर की घोषणा की थी, जिसमें कहा गया था कि वह लेबनान से हट जाएगा, लेकिन इजरायली सेनाएं अब भी कई स्थानों पर मौजूद हैं। उनका कहना है कि हिजबुल्लाह की गतिविधियों के कारण वे हमले कर रहे हैं।
विस्थापन और हताहत
इजरायल ने हवाई हमलों के साथ-साथ कई बार अपने सैनिकों को लेबनान की सीमा में भेजा है। इन हमलों के कारण लेबनान में 10 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, और कम से कम 1530 लोग मारे गए हैं, जबकि 4812 लोग घायल हुए हैं।
संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
हालांकि, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष की कहानी केवल वर्तमान घटनाओं तक सीमित नहीं है। 1980 के दशक से हिजबुल्लाह का इजरायल के साथ टकराव जारी है। जब इजरायल ने लेबनान पर कब्जा करने की कोशिश की थी, तब भी हिजबुल्लाह ने इसका विरोध किया था। तब से, जब भी इजरायल ईरान या उसके सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई करता है, हिजबुल्लाह हमेशा प्रतिशोध के लिए तैयार रहता है।
