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वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा में विशेष व्यंजन शामिल

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत की तीन दिवसीय यात्रा के दौरान कई पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया। गया अनरसा, मिथिला मखाना, और हाजीपुर मालभोग केला जैसे विशेष व्यंजन उनकी मेज़बानी में शामिल थे। इन व्यंजनों की अनूठी विशेषताएँ और बिहार की कृषि विरासत को दर्शाते हैं। जानें इन व्यंजनों के बारे में और उनकी सांस्कृतिक महत्वता के बारे में।
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वियतनाम के राष्ट्रपति की भारत यात्रा में विशेष व्यंजन शामिल

वियतनाम के राष्ट्रपति की राजकीय यात्रा

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा के दौरान कई विशेष व्यंजनों का स्वाद लिया। उन्हें गया अनरसा, मिथिला मखाना, हाजीपुर मालभोग केला और रत्नागिरी आम जैसे पारंपरिक व्यंजन परोसे गए।


रत्नागिरी आम, जिसे अल्फांसो या हापुस के नाम से भी जाना जाता है, इन व्यंजनों में शामिल था।


इस यात्रा के दौरान तो लाम को बिहार के नालंदा जिले के सिलाव की प्रसिद्ध मिठाई ‘सिलाव खाजा’ भी परोसी गई, जिसे उसकी अनूठी पहचान और विरासत के लिए जीआई टैग प्राप्त है।


विशेष व्यंजनों की विशेषताएँ

खस्ता और कुरकुरी इस मिठाई को मैदा, चीनी और घी का उपयोग करके सदियों पुरानी तकनीकों से बनाया जाता है।


गया अनरसा, जो बिहार के गया का एक पारंपरिक व्यंजन है, चावल के आटे, गुड़, मावा (खोया) और घी से तैयार किया जाता है। इसे खसखस या तिल लगाकर तलते हैं।


वियतनाम के राष्ट्रपति को परोसा गया एक और व्यंजन मिथिला मखाना था, जिसे कमल गट्टे के नाम से भी जाना जाता है। यह बिहार के मिथिला क्षेत्र का एक प्रमुख कृषि उत्पाद है, जिसे इसकी अनूठी उत्पत्ति और गुणवत्ता के लिए जीआई टैग मिला है।


बिहार की कृषि विरासत

यह उत्पाद प्रोटीन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर है, जो बिहार की कृषि विरासत और स्थानीय किसानों की कुशलता का प्रतीक है।


वियतनाम के राष्ट्रपति को हाजीपुर मालभोग केला भी परोसा गया, जो बिहार के हाजीपुर में उगाई जाने वाली एक उत्कृष्ट किस्म है। इसकी सुगंध, प्राकृतिक मिठास और मुलायम बनावट के लिए इसे जाना जाता है।


इसके अलावा, महाराष्ट्र के रत्नागिरी के आम भी राष्ट्रपति को परोसे गए।