वेनेजुएला के तेल पर अमेरिका की नजर: क्या बढ़ेगा वैश्विक तनाव?
वैश्विक तनाव का नया मोड़
नई दिल्ली: वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार को लेकर वैश्विक तनाव एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका को वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह मांग दुनिया को एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर ले जा सकती है।
अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई
इस संदर्भ में, अमेरिकी नौसेना ने 'शैडो फ्लीट' से जुड़े तेल टैंकरों को जब्त करने का अभियान शुरू कर दिया है। इस कदम से रूस और चीन की प्रतिक्रिया तीव्र हुई है। रूस ने इसे समुद्री डकैती करार दिया है और अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जबकि चीन ने अपनी नौसेना को सक्रिय करने का ऐलान किया है।
समुद्री टकराव की आशंका
अमेरिकी नौसेना रूसी तेल टैंकरों को घेरने की तैयारी कर रही है, जबकि रूसी पनडुब्बियां अटलांटिक महासागर की ओर बढ़ रही हैं। यह आशंका जताई जा रही है कि चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर भी जल्द ही बड़े मिशन पर निकल सकते हैं। अटलांटिक में महासंग्राम की स्थिति बनती जा रही है, जिससे तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका बढ़ रही है।
वेनेजुएला का तेल: टकराव का केंद्र
अमेरिका, रूस और चीन के बीच वेनेजुएला के तेल को लेकर सीधा सैन्य टकराव हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति के सामने तीन शर्तें रखी हैं:
पहली, वेनेजुएला को चीन, रूस और ईरान से सभी व्यापारिक समझौते समाप्त करने होंगे।
दूसरी, तेल उत्पादन में केवल अमेरिका के साथ साझेदारी करनी होगी।
तीसरी, तेल बिक्री में अमेरिका को प्राथमिकता देनी होगी।
ट्रंप का स्पष्ट इरादा
ट्रंप ने वेनेजुएला के संबंध में अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि इराक की स्थिति से भिन्नता है, क्योंकि बुश ने तेल नहीं रखा था, लेकिन हम इसे अपने पास रखेंगे। यह बयान दर्शाता है कि ट्रंप वेनेजुएला से एक बूंद तेल भी किसी अन्य देश को नहीं जाने देंगे।
टैंकरों पर अमेरिका का ध्यान
अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल ले जाने वाले टैंकरों को अपना मुख्य लक्ष्य बना लिया है, विशेषकर वे टैंकर जो 3 जनवरी की रात को वेनेजुएला के बंदरगाहों से निकले थे। इससे पहले, अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल पर नाकाबंदी लागू की थी और सभी आने-जाने वाले टैंकरों की निगरानी शुरू कर दी थी।
एयरस्ट्राइक और टैंकरों की स्थिति
3 जनवरी की रात अमेरिका ने वेनेजुएला में एयरस्ट्राइक की, जिससे बंदरगाहों को नुकसान पहुंचा। सभी तेल टैंकरों को जब्त करने की योजना थी, लेकिन कई जहाज पहले ही निकलने में सफल रहे। इन टैंकरों ने 'डार्क मोड' चालू कर दिया, जिससे उनकी लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो गया।
16 टैंकरों की पहचान
अमेरिका ने लगभग 16 तेल टैंकरों की पहचान की है, जिनमें करीब 1.2 करोड़ बैरल तेल भरा हुआ था। इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल की सप्लाई पर पूरी तरह रोक लगा दी। रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल अमेरिका को छोड़कर किसी भी देश को वेनेजुएला से तेल की आपूर्ति नहीं हो रही है।
चीन को बड़ा झटका
इस निर्णय से चीन को भारी नुकसान हुआ है, क्योंकि वह वेनेजुएला से प्रतिदिन लगभग 7 लाख बैरल तेल खरीदता था। अब सारा तेल अमेरिका को भेजा जा रहा है, जिससे चीन की ऊर्जा रणनीति को बड़ा झटका लगा है।
शैडो फ्लीट पर नजर
अमेरिका ने रूस और ईरान की शैडो फ्लीट के टैंकरों को भी निशाने पर लिया है। अमेरिकी सेना ने इन टैंकरों की घेराबंदी शुरू कर दी है और इन्हें जब्त करने का अभियान तेज किया जाएगा। अटलांटिक में मौजूद तेल टैंकर फिलहाल अमेरिका का प्रमुख लक्ष्य बने हुए हैं।
चीन और रूस की सैन्य गतिविधियाँ
इस बीच, अमेरिका ने अपनी सैटेलाइट के माध्यम से चीनी नौसेना की निगरानी बढ़ा दी है। तस्वीरों में चीन के नौसैनिक अड्डों पर भारी हलचल देखी गई है। दावा किया जा रहा है कि चीन के तीनों एयरक्राफ्ट कैरियर तैनाती के लिए तैयार हैं। वहीं, रूस पहले ही अपने युद्धपोत और पनडुब्बियां तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए उतार चुका है।
रूसी झंडे वाले जहाजों का बढ़ता खतरा
रिपोर्टों के अनुसार, वेनेजुएला तट के पास मौजूद प्रतिबंधित तेल टैंकर अब रूसी झंडों का उपयोग कर रहे हैं, ताकि अमेरिकी कार्रवाई से बचा जा सके। अब तक ऐसे पांच रूसी जहाजों की पहचान हो चुकी है। वेनेजुएला के तेल को लेकर वैश्विक महाजंग की आशंका लगातार बढ़ती जा रही है।
तेल कंपनियों की दुविधा
इस पूरे हालात के बीच अमेरिकी तेल कंपनियां फिलहाल वेनेजुएला लौटने से हिचक रही हैं। खराब इंफ्रास्ट्रक्चर, भारी निवेश की आवश्यकता, महंगे प्रोसेसिंग खर्च और कच्चे तेल की गिरती कीमतों के कारण मुनाफे पर संदेह है। कंपनियों का मानना है कि मुनाफा आने में कई साल लग सकते हैं।
जल्दबाजी का खतरा
ट्रंप अब अमेरिकी तेल कंपनियों को मनाने के लिए इस हफ्ते बैठक करने वाले हैं, ताकि वेनेजुएला से जल्द से जल्द तेल एक्सपोर्ट शुरू किया जा सके। लेकिन जानकारों का मानना है कि ट्रंप की यह जल्दबाजी दुनिया को एक बड़े सैन्य संघर्ष की ओर धकेल सकती है।
