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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के मातृत्व पर ईरान का तीखा जवाब

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के नवजात बेटी के जन्म की खुशी ने ईरान के तीखे जवाब को जन्म दिया। ईरान ने सोशल मीडिया पर लेविट को बधाई देते हुए अमेरिका के हमलों में मारे गए बच्चों की माताओं का दर्द याद दिलाया। इस विवाद ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बहस को फिर से जीवित कर दिया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और ईरान के तंज के पीछे की सच्चाई।
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व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव के मातृत्व पर ईरान का तीखा जवाब

कैरोलिन लेविट की खुशी पर विवाद

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट के मां बनने की खुशी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक बहस को जन्म दिया है। ईरान ने उन्हें बेटी के जन्म पर बधाई देते हुए अमेरिका पर तीखा हमला किया। ईरानी अधिकारियों ने सोशल मीडिया पर कहा कि जब लेविट अपनी बेटी को प्यार करें, तब उन माताओं के दर्द को भी याद करें, जिनके बच्चे अमेरिकी हमलों में मारे गए।


नवजात बेटी का स्वागत

हाल ही में, कैरोलिन लेविट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी नवजात बेटी विवियाना के जन्म की घोषणा की। उन्होंने अपनी बेटी की तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि 1 मई को उनका परिवार एक नई खुशी से भर गया। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह स्वस्थ है और परिवार के सभी सदस्य इस खास पल का आनंद ले रहे हैं।


खुशियों का इजहार

लेविट ने फोटो के साथ लिखा, '1 मई को विवियाना, जिसे हम 'वीवी' कहते हैं, हमारे परिवार का हिस्सा बनी। उसे देखकर हमारा दिल प्यार से भर गया। वह पूरी तरह स्वस्थ है और बिल्कुल परफेक्ट है। उसका बड़ा भाई भी अपनी छोटी बहन के साथ नई जिंदगी में खुश है। हम इस खूबसूरत समय के हर पल का आनंद ले रहे हैं।'


उन्होंने आगे कहा, 'मेरी प्रेग्नेंसी के दौरान जिन लोगों ने दुआएं भेजीं, उनका दिल से धन्यवाद। मैंने इस सफर में आपकी दुआओं को महसूस किया। भगवान बहुत दयालु हैं।'


ईरान का तीखा तंज

इसके बाद, आर्मेनिया में ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'आपको बधाई। बच्चे मासूम और प्यारे होते हैं। लेकिन मिनाब के स्कूल में जिन 168 बच्चों की मौत आपके बॉस ने कराई, वे भी बच्चे थे। जब आप अपनी बेटी को चूमें, तब उन बच्चों की माताओं के बारे में सोचिए।'



मिनाब स्कूल हमले का विवाद

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर हुए हमले में कम से कम 165 लोगों की जान गई थी। यह हमला अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के दौरान हुआ। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, हमले का मुख्य लक्ष्य ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का नौसैनिक अड्डा था, लेकिन स्कूल भी इसकी चपेट में आ गया।