सऊदी अरब की ऊर्जा संकट: कच्चे तेल के निर्यातक अब फ्यूल ऑयल के आयातक
सऊदी अरब की नई चुनौतियाँ
नई दिल्ली: सऊदी अरब, जो विश्व के प्रमुख तेल निर्यातकों में से एक है, वर्तमान में एक अनोखी समस्या का सामना कर रहा है। लंबे समय से कच्चा तेल निर्यात करने वाला यह देश अब खुद बिजली उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर फ्यूल ऑयल का आयात कर रहा है।
विशेषज्ञों की राय
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े संकट ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक गैस उत्पादन में कमी के कारण सऊदी अरब को वैकल्पिक ईंधन पर निर्भर होना पड़ रहा है।
हालिया अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब में गैस उत्पादन में गिरावट आई है, जिसका प्रभाव बिजली उत्पादन पर पड़ा है। देश ने लंबे समय से प्राकृतिक गैस पर आधारित ऊर्जा प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास किया था, लेकिन गैस की कमी के कारण अब फ्यूल ऑयल का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।
आयात में वृद्धि
ऊर्जा बाजार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने सऊदी अरब ने प्रतिदिन लगभग 3 लाख 60 हजार बैरल फ्यूल ऑयल का आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 86 प्रतिशत अधिक है। जानकारों का कहना है कि गर्मियों में बिजली की मांग बढ़ने के कारण यह आयात और भी बढ़ सकता है।
खाड़ी देशों में तापमान में वृद्धि के साथ एयर कंडीशनर का उपयोग भी बढ़ता है, जिससे बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाती है। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इस वर्ष सऊदी अरब में बिजली उत्पादन के लिए फ्यूल ऑयल और कच्चे तेल की खपत 10 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक हो सकती है।
तेल उत्पादन पर प्रभाव
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव का असर तेल उत्पादन पर भी पड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब को अपने तेल उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है, जिससे प्रतिदिन लाखों बैरल उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसके साथ ही, कच्चे तेल से निकलने वाली प्राकृतिक गैस की सप्लाई भी कम हो गई है।
हालांकि, सऊदी अरब अपनी ऊर्जा नीति में बदलाव की दिशा में काम कर रहा है। देश बिजली उत्पादन में फ्यूल ऑयल के स्थान पर प्राकृतिक गैस का उपयोग बढ़ाना चाहता है। इसी दिशा में जाफुराह गैस फील्ड प्रोजेक्ट पर भारी निवेश किया जा रहा है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े गैस प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है, लेकिन इसके पूरी क्षमता से शुरू होने में अभी कई वर्ष लग सकते हैं।
