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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: वैश्विक ईंधन आपूर्ति के लिए नए विकल्पों की खोज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से वैश्विक ईंधन संकट उत्पन्न हो गया है, जिसके चलते विभिन्न देश नए विकल्पों की खोज में जुट गए हैं। भारत, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई जैसे देश अपनी रणनीतियों को बदल रहे हैं। सऊदी अरब ने पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को सक्रिय किया है, जबकि यूएई ने नई पाइपलाइनें बनाई हैं। भारत ने भी यूएई के साथ समझौता किया है। इस संकट के बीच, अमेरिका वेनेजुएला के तेल पर नजर रख रहा है। जानें इन देशों की योजनाओं के बारे में।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट: वैश्विक ईंधन आपूर्ति के लिए नए विकल्पों की खोज

ईंधन संकट का सामना

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने से वैश्विक ईंधन संकट उत्पन्न हो गया है। वर्तमान में यह स्पष्ट नहीं है कि यह जलमार्ग कब फिर से खुलेगा, लेकिन दुनिया ने इसके विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है ताकि भविष्य में किसी भी घटना के कारण ईंधन की आपूर्ति बाधित न हो।


खाड़ी देशों की रणनीतियाँ

खाड़ी के देश भी होर्मुज की खाड़ी को बायपास करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था अपने ईंधन आपूर्ति में विविधता लाने की कोशिश कर रही है, जबकि पाकिस्तान भी रणनीतिक तेल भंडार बनाने की योजना बना रहा है। इसी बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भारत में अपने तेल भंडार को स्थापित करने का निर्णय लिया है।


सऊदी अरब की पहल

सऊदी अरब की पेट्रोलाइन: सऊदी अरब, जो कि एक प्रमुख तेल उत्पादक देश है, ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करने के लिए पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को पूरी क्षमता से चलाने का निर्णय लिया है। यह 1200 किमी लंबी पाइपलाइन अब्कैक और रास तानूरा ऑयल फील्ड से कच्चा तेल लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है। इस पाइपलाइन के माध्यम से सऊदी अरब होर्मुज में प्रवेश किए बिना वैश्विक तेल आपूर्ति कर सकता है।


यूएई की नई पाइपलाइन

फुजैराह पाइपलाइन: संयुक्त अरब अमीरात ने अबू धाबी से फुजैराह बंदरगाह तक एक नई पाइपलाइन का निर्माण किया है, जिससे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करके भारत तक तेल भेजना आसान हो गया है। इसके अलावा, यूएई ओमान तक एक और पाइपलाइन का निर्माण कर रहा है, जो अगले वर्ष तक चालू होने की उम्मीद है।


तुर्की और इराक की योजनाएँ

नई पाइपलाइन बनाने की कोशिशें

इराक और तुर्की के बीच एक पाइपलाइन है, जो भूमध्य सागर तक कच्चा तेल पहुंचाती है। तुर्की ने नाटो ईंधन पाइपलाइन परियोजना का प्रस्ताव रखा है, जिससे नाटो के पूर्वी हिस्से में ईंधन की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। इराक ने सीरिया के बनियास बंदरगाह तक एक नई तेल पाइपलाइन बनाने का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि युद्ध के कारण घटे तेल निर्यात की भरपाई की जा सके।


पाकिस्तान की रणनीति

पाकिस्तान की पहल: पाकिस्तान ने हाल ही में इराक के साथ मिलकर ईरान के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत ईरान दोनों देशों के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से निकलने में मदद करेगा। इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने पर विचार कर रही है, लेकिन बजट की कमी इसके लिए बाधा बन रही है।


भारत की तैयारी

भारत के कदम: भारत ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात के साथ एक रणनीतिक तेल भंडार समझौता किया है, जिसके तहत यूएई भारत में अपने तेल भंडार को बढ़ाएगा। दोनों देशों ने एलपीजी भंडारण की संभावनाओं पर भी चर्चा की है। युद्ध से पहले भारत 27 देशों से ईंधन खरीदता था, लेकिन अब यह 40 देशों से कच्चा तेल और गैस खरीद रहा है, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके।


वेनेजुएला के तेल पर नजर

अमेरिका की रणनीति

अमेरिका की नजर वेनेजुएला के तेल पर है, लेकिन उसकी रिफाइनरी वेनेजुएला के तेल को प्रोसेस नहीं कर सकती हैं। अमेरिका चाहता है कि वेनेजुएला से भारत तेल खरीदे, ताकि वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत की यात्रा पर आ रहे हैं, और उन्होंने दावा किया है कि वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत का दौरा करेंगी, जहां वे तेल बिक्री पर चर्चा करेंगी।