हिजबुल्ला ने इजराइल के साथ सीधी बातचीत को किया खारिज
हिजबुल्ला ने लेबनान और इजराइल के बीच प्रस्तावित सीधी बातचीत को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। नईम कासिम ने इसे गंभीर गलती बताया है, जो लेबनान की स्थिति को और अस्थिर कर सकती है। उन्होंने लेबनान सरकार के निर्णय को अपमानजनक करार दिया और चेतावनी दी कि यह देश के लिए हानिकारक है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और हिजबुल्ला की प्रतिक्रिया।
| Apr 28, 2026, 11:52 IST
हिजबुल्ला का विरोध
हिजबुल्ला ने लेबनान और इजराइल के बीच प्रस्तावित सीधी बातचीत को पूरी तरह से अस्वीकार कर दिया है। इस संबंध में 27 अप्रैल को हिजबुल्ला के नेता नईम कासिम ने एक लिखित संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि इजराइल का सामना जारी रहेगा। एक अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, कासिम ने इस बातचीत को एक गंभीर गलती करार दिया और कहा कि इससे लेबनान की स्थिति और भी अस्थिर हो जाएगी। हाल के हफ्तों में, लेबनान और इजराइल के अमेरिका में तैनात राजदूतों के बीच वाशिंगटन में दो बैठकें हुईं, जो दशकों में पहली बार हुई थीं। पहली बैठक के बाद, इजराइल और हिजबुल्ला के बीच एक अस्थायी युद्ध विराम लागू हुआ।
लेबनान की स्थिति
बेरूत, जो लेबनान की राजधानी है, इजराइल के साथ शांति समझौते के लिए सीधी बातचीत की तैयारी कर रहा था। यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि 1948 से दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है। हाल ही में, इजराइल और अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खमनेई की हत्या के बाद हिजबुल्ला पर हमले किए। हिजबुल्ला, जो एक शिया बहुल संगठन है, ने इजराइल पर जवाबी हमले किए हैं। 2 मार्च से, इजराइल और हिजबुल्ला के बीच संघर्ष जारी है, और 27 अप्रैल को इजराइल ने लेबनान में हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमले किए। हिजबुल्ला का कहना है कि वह लेबनान में इजराइली आक्रमण के खिलाफ प्रतिरोध कर रहा है।
नईम कासिम का बयान
नईम कासिम ने कहा कि लेबनान सरकार का यह निर्णय अपमानजनक है और इसे बिना किसी कारण के स्वीकार किया गया है। उन्होंने इसे एक ऐसा सरेंडर बताया जो किसी भी कीमत पर नहीं होना चाहिए था। कासिम ने स्पष्ट किया कि वे लेबनान और इजराइल के बीच हो रही सीधी बातचीत को पूरी तरह से खारिज करते हैं। उन्होंने लेबनान की सत्ता में बैठे लोगों को चेतावनी दी कि उनका यह रवैया देश के लिए हानिकारक है। कासिम ने कहा कि उन्हें अपनी गलतियों से सीखना चाहिए और इजराइल के साथ सीधी बातचीत को रोकना चाहिए।
