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चीन की यूनिवर्सिटी में अनजान कॉल से छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने वाला अनोखा कोर्स

चीन की नानजिंग यूनिवर्सिटी में छात्रों को अनजान नंबर से कॉल करने का असाइनमेंट दिया जाता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है। इस कोर्स का उद्देश्य छात्रों को नए लोगों से बातचीत करने में मदद करना है। हालांकि, यह कार्य आसान नहीं है, क्योंकि कई छात्र इसे चुनौतीपूर्ण मानते हैं। प्रोफेसर शू काई का यह अनोखा कोर्स न केवल बोलने की कला सिखाता है, बल्कि सुनने और समझने की क्षमता को भी विकसित करता है। जानें इस कोर्स के बारे में और कैसे यह छात्रों के लिए एक यादगार अनुभव बनता है।
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नई दिल्ली: अनजान नंबर से कॉल का सामना


नई दिल्ली: आजकल लोग अनजान नंबर से आने वाली कॉल को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन चीन की एक यूनिवर्सिटी ने इस डर को छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए एक अवसर में बदल दिया है। नानजिंग यूनिवर्सिटी में छात्रों को असाइनमेंट के तहत किसी अजनबी को फोन करके उसका इंटरव्यू लेना होता है। यह कोर्स, जिसे 'ओरल एक्सप्रेशन' कहा जाता है, 2015 में पूर्व टीवी प्रोड्यूसर-डायरेक्टर शू काई द्वारा शुरू किया गया था।


शू काई ने देखा कि कई प्रतिभाशाली छात्र नए लोगों से बातचीत करने में संकोच करते हैं। इस संकोच को दूर करने के लिए उन्होंने यह प्रैक्टिकल कोर्स तैयार किया, जो अब यूनिवर्सिटी का सबसे लोकप्रिय कोर्स बन चुका है।


कॉल करने की चुनौती

30 कॉल में से 5 ने उठाया फोन


इस कोर्स का सबसे कठिन कार्य अनजान व्यक्ति को कॉल करना है। छात्रों को बिना किसी परिवार या दोस्तों की मदद के अजनबियों को मनाना होता है और उनसे सवाल पूछने होते हैं। असली चुनौती तब आती है जब सामने वाला कॉल ही न उठाए या ठग समझकर फोन काट दे। एक छात्र होंग यिमिंग ने बताया कि उसने 30 से अधिक नंबरों पर कॉल की, जिनमें से केवल 5 लोगों ने फोन उठाया। तीन ने तुरंत कॉल काट दिया, जबकि एक ने उसे धोखेबाज समझा। अंततः एक IT पेशेवर ने बातचीत के लिए सहमति दी और करियर योजनाओं, नानजिंग में घूमने की जगहों और अपनी दो बिल्लियों के बारे में चर्चा की। यह अनुभव छात्र के लिए एक यादगार पल बन गया।


कई छात्रों ने इस टास्क को इतना कठिन पाया कि उन्होंने कोर्स छोड़ने का निर्णय लिया, लेकिन जिन्होंने इसे पूरा किया, उन्होंने इसे जारी रखने की अपील की। उनका मानना है कि इससे उनकी झिझक दूर होती है और आत्म-समझ में सुधार होता है।


सुनने की कला भी सिखाते हैं

सिर्फ बोलना नहीं, सुनना भी सीखाते हैं


प्रोफेसर शू काई का कहना है कि अच्छी बातचीत का अर्थ केवल बोलना नहीं है, बल्कि सुनना, सामने वाले की स्थिति को समझना और उनके समय का सम्मान करना भी शामिल है। इस क्लास में शब्दों के साथ-साथ बॉडी लैंग्वेज, आई-कॉन्टैक्ट, चेहरे के हाव-भाव और हाथों के इशारों पर भी ध्यान दिया जाता है। आज की डिजिटल पीढ़ी के लिए यह क्लास अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह असाइनमेंट छात्रों को नौकरी के इंटरव्यू से लेकर ऑफिस में तालमेल बनाने तक, असली जिंदगी के लिए तैयार करता है।