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75 वर्षीय पाकिस्तानी महिला की भारत यात्रा: पुरानी यादों का सफर

A heartwarming story unfolds as a 75-year-old Pakistani woman, Hamida, revisits her childhood home in Gurgaon, India. After being separated from her roots during the partition, she embarks on a journey filled with nostalgia and emotion. Her grandson, Rafay Akbar, shares her touching story on social media, resonating with many who have similar memories. This journey not only highlights the personal connections that transcend borders but also evokes a sense of shared history among families affected by the partition. As the older generation fades away, their stories and memories become even more precious.
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भारत-पाकिस्तान के बंटवारे की यादें


नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के विभाजन की घटनाएँ आज भी कई परिवारों के दिलों में ताजा हैं। दोनों देशों में रहने वाले बुजुर्गों के पास उस समय के कई ऐसे किस्से हैं, जो सुनकर युवा पीढ़ी भी भावुक हो जाती है। हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें एक पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर ने अपनी दिवंगत दादी की कहानी साझा की है।


75 साल की उम्र में भारत की यात्रा

पाकिस्तानी कंटेंट क्रिएटर राफे अकबर ने बताया कि उनकी दादी, हमीदा, का भारत से गहरा संबंध था। उनका जन्म गुड़गांव (गुरुग्राम) में हुआ था, लेकिन बंटवारे के समय उन्हें पाकिस्तान जाना पड़ा। फिर भी, उनका बचपन और पुराना घर हमेशा उनकी यादों में बसा रहा।


राफे ने कहा कि परिवार चाहता था कि उनकी दादी एक बार फिर अपने पुराने घर और शहर का दौरा करें। परिवार के सात सदस्यों ने वीजा के लिए आवेदन किया, लेकिन केवल 75 वर्षीय हमीदा का वीजा स्वीकृत हुआ।


परिवार को चिंता थी कि इतनी उम्र में वह अकेले यात्रा कैसे करेंगी, लेकिन दादी ने भावुकता से कहा कि कोई अपने घर का रास्ता कैसे भूल सकता है।


पुरानी यादों का पुनर्मिलन

हमीदा अकेले भारत आईं और गुड़गांव जाकर उन यादों को फिर से जीया, जिन्हें उन्होंने वर्षों से अपने दिल में संजोकर रखा था। कुछ समय बाद, वह पाकिस्तान लौटने के बाद निधन हो गईं।


 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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राफे ने बताया कि उनकी दादी भारत-पाकिस्तान के क्रिकेट मैचों में दोनों टीमों का समर्थन करती थीं। उनके लिए सरहद से ज्यादा महत्वपूर्ण अपने पुराने घर और उससे जुड़ी यादें थीं।


वीडियो ने लोगों को किया भावुक

जब राफे अपनी दादी की कहानी सुनाते हैं, तो वह खुद भी भावुक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि बंटवारे को अपनी आंखों से देखने वाली पीढ़ी अब धीरे-धीरे समाप्त हो रही है, और उनके साथ कई अनमोल यादें भी चली जा रही हैं। इस वीडियो को सोशल मीडिया पर लोगों का भरपूर प्यार मिल रहा है। कई यूजर्स ने अपने दादा-दादी और नाना-नानी से जुड़ी बंटवारे की यादें भी साझा की हैं।