अंटार्कटिका के 'ब्लड फॉल्स': एक रहस्यमय जलप्रपात जो खून जैसा दिखता है
अंटार्कटिका का अनोखा जलप्रपात
नई दिल्ली: अंटार्कटिका, जो कि दुनिया का सबसे ठंडा और सुनसान महाद्वीप है, में एक अद्भुत स्थान है। यहां एक ग्लेशियर से निरंतर लाल रंग का पानी बहता है, जिसे देखकर ऐसा लगता है जैसे खून की धारा बह रही हो। इस अद्भुत स्थान को 'ब्लड फॉल्स' के नाम से जाना जाता है। वर्षों तक इसे प्राकृतिक करिश्मा या अंधविश्वास से जोड़ा गया, लेकिन विज्ञान ने इसके पीछे का सच उजागर किया, जो बेहद चौंकाने वाला था। असल में, यह पानी लोहे (आयरन) से भरपूर है, न कि खून से।
ग्रिफिथ टेलर की खोज
ग्रिफिथ टेलर ने 1911 में खोजी थी यह पहेली
इस 'ब्लीडिंग ग्लेशियर' के बारे में सबसे पहले ऑस्ट्रेलियाई भूविज्ञानी ग्रिफिथ टेलर ने 1911 में जानकारी दी थी। उन्होंने उस समय अनुमान लगाया था कि बर्फ पर मौजूद लाल काई या एल्गी के कारण पानी का रंग ऐसा दिखाई देता है। लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और नई तकनीकें आईं, असली सच सामने आया। वैज्ञानिकों ने पाया कि टेलर ग्लेशियर के नीचे एक विशाल झील दबी हुई है, जिसमें नमक की मात्रा सामान्य समुद्री पानी से कई गुना अधिक है, जिससे यह पानी कभी नहीं जमता।
रासायनिक प्रक्रिया का रहस्य
रासायनिक अभिक्रिया का 'खूनी' खेल
इस झरने के लाल रंग का असली कारण एक दिलचस्प रासायनिक प्रक्रिया है। जब यह अत्यधिक नमकीन और लोहे से समृद्ध पानी ग्लेशियर की दरारों से बाहर आता है, तो यह हवा के संपर्क में आता है। जैसे ही ऑक्सीजन इस पानी से मिलती है, लोहे में ऑक्सीकरण होने लगता है। सरल शब्दों में, पानी में जंग लग जाती है, जिससे यह लाल खून जैसा दिखने लगता है।
एक अद्भुत पारिस्थितिकी तंत्र
बर्फ की गहराई में छिपी है एक अलग दुनिया
'ब्लड फॉल्स' केवल अपने रंग के लिए ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए एक नए ब्रह्मांड का द्वार भी बन चुका है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि इस भूमिगत झील में लाखों सालों से सूक्ष्म जीव जीवित हैं। ये बैक्टीरिया सल्फेट और लोहे के कणों से ऊर्जा प्राप्त करते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस झरने का अध्ययन करके यह समझा जा सकता है कि अन्य ग्रहों पर जीवन कैसे पनप सकता है।
सोशल मीडिया पर चर्चा
Nature is awesome.
— Fascinating History (@Fascinate_Hist) December 22, 2025
"Blood Falls" in Antarctica. pic.twitter.com/Us9BXO4jBY
