इंडोनेशिया में भूकंप के बीच डॉक्टरों ने किया चमत्कार, नवजात बच्ची का नाम 'जेम्पिता'
भूकंप की तबाही और डॉक्टरों का साहस
नई दिल्ली: इंडोनेशिया के ईस्ट नुसा तेंगारा क्षेत्र में आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई है। जब धरती कांप रही थी और अस्पतालों की इमारतें हिल रही थीं, तब वहां के चिकित्सकों ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया। इस भयानक स्थिति में, डॉक्टरों की एक समर्पित टीम ने टॉर्च की रोशनी में जटिल सर्जरी कर एक नवजात बच्ची को सुरक्षित रूप से जन्म दिया। इस बच्ची का नाम 'जेम्पिता' रखा गया है, जो इंडोनेशियाई शब्द 'जेम्पा' से लिया गया है, जिसका अर्थ 'भूकंप' है।
आशा की किरण amidst Destruction
इंडोनेशिया के ईस्ट नुसा तेंगारा में आए भूकंप ने 54 से अधिक लोगों की जान ले ली है और कई इमारतें ध्वस्त हो गई हैं। आफ्टरशॉक्स के डर से लोग अपने घरों में लौटने से हिचकिचा रहे हैं और खुले मैदानों में बने टेंटों में शरण ले रहे हैं। इस संकट के बीच, स्वास्थ्यकर्मी घायलों का इलाज करने में जुटे हैं।
सुरक्षित राहत टेंट में नवजात का जन्म
बच्ची का वजन 1.3 किलोग्राम था और वह समय से लगभग दो महीने पहले पैदा हुई थी, जिससे उसकी स्थिति नाजुक थी। अस्पताल में वेंटिलेटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, और भूकंप के बाद मुख्य इमारत में रहना खतरनाक था। ऐसे में डॉक्टरों ने बच्ची को इनक्यूबेटर में रखकर अस्पताल के बाहर लगाए गए राहत टेंट में भेजने का निर्णय लिया। प्रसव के बाद, मां मारिया को रक्तस्राव की समस्या हुई, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को स्थिर कर दिया। मारिया ने डॉक्टरों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके साहस ने उन्हें हिम्मत दी। इस भयानक स्थिति में 'जेम्पिता' का जन्म सभी के लिए आशा की नई किरण बनकर उभरा है।
डॉक्टरों का साहसिक कार्य
39 वर्षीय मारिया फ्लोरिडा नोगो केलेन की गर्भावस्था में पहले से ही जटिलताएं थीं। भूकंप के दौरान उनकी स्थिति अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने बताया कि यदि डिलीवरी में थोड़ी भी देरी होती, तो मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, डॉक्टर योना सारा पारदेड़े और उनकी टीम ने तुरंत सिजेरियन डिलीवरी करने का साहसिक निर्णय लिया। अस्पताल में लगातार झटके आ रहे थे और बिजली बार-बार चली जा रही थी, लेकिन डॉक्टरों ने हार नहीं मानी और टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया।
