क्या 170 साल पुराना खड़ा हनुमान मंदिर सुरक्षित रहेगा? प्रशासन की चुनौती बढ़ी
मंदिर की सुरक्षा पर प्रशासन की दुविधा
नई दिल्ली: नगर निगम की टीम ने 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर को हटाने का प्रयास किया, लेकिन मुख्य हनुमान प्रतिमा को हटाने में उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा। प्रारंभिक कार्रवाई में मंदिर के कुछ हिस्सों को तोड़ दिया गया, लेकिन प्रशासन अब प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए सतर्क है।
पुरातत्व विभाग की चेतावनी
प्रतिमा को लेकर पुरातत्व विभाग की चेतावनी
जब मूर्ति को हटाने का प्रयास किया गया, तो पुरातत्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का आकलन किया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मूर्ति को हिलाने से उसमें दरार आ सकती है। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मूर्ति को बिना नुकसान पहुंचाए हटाया जाए। मंदिर का बाहरी हिस्सा हटाना संभव है, लेकिन 170 साल पुरानी मुख्य प्रतिमा को सुरक्षित निकालना एक कठिन कार्य है। इस कारण प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच आगे की कार्रवाई पर चर्चा चल रही है।
श्रद्धालुओं की भावनाएं
कार्रवाई के दौरान मौके पर जुटे श्रद्धालु
मंदिर में कार्रवाई की खबर सुनते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु वहां इकट्ठा हो गए। कई भक्त मंदिर के हिस्सों को टूटते देखकर भावुक हो गए। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह मंदिर उनके लिए केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। पुजारी महेश पंडित और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की है। कुछ हिंदू संगठनों ने भी इस कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।
प्रशासन की चुनौती
प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती
वर्तमान में मंदिर की स्थिति असमंजस में है। प्रशासन को कार्रवाई को आगे बढ़ाने और प्राचीन प्रतिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के बीच संतुलन बनाना है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या विशेषज्ञों की मदद से मूर्ति को सुरक्षित तरीके से हटाने का कोई समाधान निकलता है या प्रशासन को अपनी योजना पर पुनर्विचार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
