Newzfatafatlogo

क्या iPhone Duo की मजबूती पर उठे सवाल? जानें ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के नतीजे

एप्पल के पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo की ड्यूरेबिलिटी टेस्ट ने तकनीकी प्रेमियों के बीच बहस छेड़ दी है। इस अल्ट्रा-प्रीमियम डिवाइस की कीमत 3 लाख रुपये है, लेकिन हालिया परीक्षणों ने इसकी मजबूती पर गंभीर सवाल उठाए हैं। यूट्यूबर जैक नेल्सन द्वारा किए गए टेस्ट में फोन की अंदरूनी स्क्रीन और हिंज मैकेनिज्म की स्थिति चिंताजनक पाई गई। सोशल मीडिया पर यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं, जिसमें कई लोगों ने निराशा व्यक्त की है। क्या iPhone Duo वाकई रोजमर्रा के उपयोग के लिए तैयार है? जानें पूरी कहानी में।
 | 

iPhone Duo की ड्यूरेबिलिटी टेस्ट पर चर्चा


नई दिल्ली: एप्पल के पहले फोल्डेबल स्मार्टफोन iPhone Duo को लेकर टेक जगत में काफी उत्साह बना हुआ था। इस अल्ट्रा-प्रीमियम डिवाइस की कीमत लगभग 3 लाख रुपये है, जिससे यूजर्स को बेहतरीन परफॉर्मेंस और मजबूती की उम्मीद थी। लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया पर आए ड्यूरेबिलिटी टेस्ट ने इस फोन की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यूट्यूबर जैक नेल्सन (JerryRigEverything) द्वारा किए गए इस टेस्ट का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर संजू चौधरी (@saaaanjjjuuu) ने साझा किया, जिसके बाद फोन की बिल्ड क्वालिटी पर चर्चाएं तेज हो गईं।


क्या है इनर स्क्रीन की स्थिति?

टेस्ट के पहले चरण में फोन के बाहरी डिस्प्ले का परीक्षण किया गया। iPhone Duo की बाहरी स्क्रीन ने अपेक्षानुसार अच्छा प्रदर्शन किया। इसमें इस्तेमाल किया गया नया 'Ceramic Shield 2' ग्लास हालिया फ्लैगशिप आईफोन मॉडल्स की तरह ही मजबूत साबित हुआ और सामान्य खरोंचों को झेलने में सक्षम रहा।


असली समस्या कब शुरू हुई?

जब टेस्ट फोन की अंदरूनी फोल्डेबल स्क्रीन और उसके हिंज मैकेनिज्म पर पहुंचा, तब असली समस्या सामने आई। हार्डनेस स्केल पर परीक्षण के दौरान पाया गया कि अंदरूनी फ्लेक्सिबल डिस्प्ले पर लेवल 2 पर खरोंचें आने लगीं। इसका मतलब है कि रोजमर्रा के उपयोग में चाबियों, सिक्कों, नाखूनों या जेब की धूल-मिट्टी से स्क्रीन पर स्थाई निशान पड़ सकते हैं। फोल्डेबल फोन का हिंज उसकी रीढ़ होता है। हालांकि, बार-बार मोड़ने पर हिंज मजबूत नजर आया, लेकिन धूल और बारीक कणों के संपर्क में आने से इसके सुचारू संचालन पर सवाल उठे। इसके अलावा, स्क्रीन की क्रीज भी समय के साथ अधिक उभरी हुई नजर आने लगी।


बेंड टेस्ट में डिस्प्ले की स्थिति

परीक्षण का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा बेंड टेस्ट रहा। जब फोन के दोनों हिस्सों पर अत्यधिक दबाव डालकर मोड़ने की कोशिश की गई, तो फोल्डेबल स्क्रीन अंदरूनी तनाव को सहन नहीं कर पाई। दबाव पड़ते ही स्क्रीन पर हरी लाइनें उभर आईं और कुछ ही पलों में पूरा डिस्प्ले काम करने लायक नहीं रहा। जानकारों के अनुसार, यदि इस तरह के फोल्डेबल फोन की अंदरूनी स्क्रीन खराब हो जाती है, तो इसे बदलवाने या ठीक कराने का खर्च लगभग 1,000 डॉलर (करीब 80,000 से 90,000 रुपये या इससे अधिक) तक पहुंच सकता है।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

वीडियो के वायरल होते ही तकनीक प्रेमियों और आम यूजर्स के बीच बहस छिड़ गई है। कई लोगों ने निराशा जाहिर करते हुए कहा कि 3 लाख रुपये जैसी प्रीमियम कीमत चुकाने के बाद भी अगर फोन का डिस्प्ले इतना नाजुक है, तो यह ग्राहकों के साथ नाइंसाफी है। कुछ यूजर्स ने मजेदार टिप्पणियां भी कीं। एक यूजर ने लिखा कि "वीडियो देखकर पहले तो फोन टूटने पर हैरानी हुई, लेकिन फिर थोड़ा मजा भी आया।" वहीं अन्य ने कहा कि उन्हें नए फोन के लॉन्च से ज्यादा इस ड्यूरेबिलिटी टेस्ट वीडियो का इंतजार था। इस घटना ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या फोल्डेबल स्मार्टफोन्स वाकई आम जीवन के लिए तैयार हैं, या फिर ये केवल देखने में आकर्षक शोपीस बनकर रह गए हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि एप्पल अपने इस फोल्डेबल हैंडसेट की स्क्रीन सुरक्षा और वारंटी नीतियों को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है।