क्या चिंपैंजी और बोनोबो भी करते हैं भावनाओं का इजहार? जानें नई रिसर्च से
भावनात्मक सहारा: इंसानों से पहले भी था स्पर्श का महत्व
नई दिल्ली: किसी प्रिय व्यक्ति को गले लगाना या कंधे पर हाथ रखना मुश्किल समय में हमें भावनात्मक सहारा प्रदान करता है। हाल ही में एक अध्ययन में यह पता चला है कि यह व्यवहार केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। हमारे करीबी पूर्वज माने जाने वाले ग्रेट एप्स, जैसे चिंपैंजी और बोनोबो भी तनावपूर्ण परिस्थितियों में एक-दूसरे को छूकर और गले लगाकर भरोसा जताते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह आदत इंसानों में भी लाखों साल पहले से मौजूद हो सकती है।
शोध का उद्देश्य और परिणाम
डरहम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने चिंपैंजी और बोनोबो के व्यवहार का गहराई से अध्ययन किया। इस रिसर्च का उद्देश्य यह समझना था कि जब इन जानवरों के बीच भोजन को लेकर तनाव उत्पन्न होता है, तब वे एक-दूसरे के साथ किस प्रकार व्यवहार करते हैं। अध्ययन के परिणाम वैज्ञानिकों के लिए भी चौंकाने वाले थे।
मूंगफली के माध्यम से अध्ययन
शोधकर्ताओं ने कांगो और जाम्बिया में रहने वाले चिंपैंजी और बोनोबो के समूहों पर ध्यान केंद्रित किया। इन जानवरों को उनके प्राकृतिक वातावरण में मूंगफली दी गई, ताकि यह देखा जा सके कि भोजन के समय उनके बीच किस तरह की प्रतिक्रिया होती है। आमतौर पर भोजन के लिए जानवरों के बीच प्रतिस्पर्धा और झगड़े की स्थिति बन सकती है, लेकिन इस रिसर्च में एक अलग व्यवहार देखने को मिला।
कई चिंपैंजी और बोनोबो भोजन मिलने से पहले एक-दूसरे के करीब आए। कुछ ने साथी को छुआ, जबकि कुछ ने गले लगाकर आपसी भरोसा जताया। शोधकर्ताओं के अनुसार, जिन जानवरों ने भोजन से पहले इस प्रकार का शारीरिक संपर्क किया, उनके बीच बाद में तनाव कम देखने को मिला। वे बिना किसी बड़े विवाद के साथ बैठकर खाना खाते नजर आए। यह संकेत देता है कि शारीरिक संपर्क इन जानवरों के बीच तनाव कम करने और सामाजिक संबंध मजबूत करने में मदद कर सकता है।
भरोसे का माहौल बनाना
रिसर्च से जुड़ी प्रोफेसर ज़न्ना क्ले ने इन वनमानुषों के व्यवहार की तुलना फुटबॉल खिलाड़ियों से की। बड़े मुकाबले से पहले खिलाड़ी अक्सर एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखते हैं या एक घेरे में खड़े होकर टीम भावना को मजबूत करते हैं। इसी तरह चिंपैंजी और बोनोबो भी तनावपूर्ण स्थिति से पहले अपने साथियों के करीब आते हैं।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह व्यवहार एक तरह का संदेश देता है कि समूह के सदस्य एक-दूसरे के साथ हैं। जिन समूहों में आपसी संबंध मजबूत थे, वहां एक ही समय में कई जानवरों ने अपने साथियों को छुआ या गले लगाया। वैज्ञानिकों ने इस क्रम को 'रीएश्योरेंस ट्रेन' यानी भरोसा दिलाने वाली श्रृंखला का नाम दिया है। यह व्यवहार यह संकेत करता है कि जानवर तनाव बढ़ने से पहले ही अपने साथियों को शांत करने की कोशिश करते हैं, जिससे समूह में आपसी भरोसा बना रहता है और भोजन जैसी प्रतिस्पर्धी स्थिति में संघर्ष की संभावना कम हो सकती है।
स्पर्श के माध्यम से भावनाओं का इजहार
यह रिसर्च 'प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी' जर्नल में प्रकाशित हुई है। अध्ययन से जुड़े डॉ. जेक ब्रूकर के अनुसार, स्पर्श के जरिए भावनाएं व्यक्त करना संवाद का एक बहुत पुराना तरीका है। इंसानों के बोलना सीखने से बहुत पहले ही जीव एक-दूसरे से संपर्क के माध्यम से अपने भाव व्यक्त करते रहे होंगे। यही कारण है कि आज भी जब कोई व्यक्ति परेशान दोस्त को गले लगाता है या उसके कंधे पर हाथ रखता है, तो यह केवल भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं होती। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके पीछे विकास की एक बहुत पुरानी प्रक्रिया भी हो सकती है।
