क्या है झारखंड के थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की दर्दनाक कहानी?
खिलाड़ी की संघर्ष भरी कहानी
नई दिल्ली: हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसने सभी का ध्यान खींचा है। यह वीडियो झारखंड के 29 वर्षीय थ्रोबॉल खिलाड़ी अमरदीप कुमार की है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया और चार स्वर्ण पदक जीते। आज, वह सड़क किनारे सब्जी बेचकर और कैब चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। इस स्थिति ने खेल व्यवस्था और खिलाड़ियों को मिलने वाली इज़्ज़त और वित्तीय सहायता पर सवाल उठाए हैं।
वीडियो में सब्जी बेचते हुए अमरदीप
इस वायरल वीडियो में अमरदीप रांची के अर्गोड़ा चौक पर सब्जी बेचते हुए नजर आ रहे हैं। उनके पीछे दीवार पर उनके जीते हुए पदक भी दिखाई दे रहे हैं। यह दृश्य उनकी उपलब्धियों और आर्थिक चुनौतियों के बीच का संघर्ष दर्शाता है, जो सोशल मीडिया यूजर्स को भावुक कर रहा है।
Heartbreaking visuals 💔
— Desi Lord (@DesiLord_) August 31, 2026
Ranchi Gold medalist selling vegetables on road 😢
This is Amardeep Kumar from Ranchi, a throwball player who represented India in Malaysia and won gold medal.
Now he is selling vegetables with medals hanging on the wall 💔💔 pic.twitter.com/oKoqpZumjR
खेल की शुरुआत और उपलब्धियां
अमरदीप ने केवल 13 साल की उम्र में थ्रोबॉल खेलना शुरू किया। उनकी प्रतिभा को देखकर एक स्थानीय खिलाड़ी ने उन्हें रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में मुफ्त प्रशिक्षण दिलवाया। उन्होंने अपने पिता की सब्जी की दुकान पर काम करते हुए खेल की तैयारी जारी रखी।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में 2015 में मलेशिया में एशियन जूनियर थ्रोबॉल चैंपियनशिप का स्वर्ण पदक, 2017 में काठमांडू में इंडो-नेपाल थ्रोबॉल चैंपियनशिप, 2019 में बेंगलुरु में साउथ एशियन थ्रोबॉल चैंपियनशिप और 2026 में रांची में आयोजित चैंपियनशिप शामिल हैं।
आर्थिक संघर्ष और मदद की अपील
अमरदीप ने बताया कि प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए उन्हें कई बार कर्ज लेना पड़ा। इन कर्जों को चुकाने के लिए वह सब्जी बेचने के साथ-साथ कैब भी चलाते हैं। उनका परिवार भी आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। उनके पिता सब्जी बेचते हैं, जबकि मां घर संभालने के साथ-साथ सब्जी बेचने का काम करती हैं।
मुख्यमंत्री का संज्ञान
वीडियो के वायरल होने के बाद, सोशल मीडिया पर लोगों ने अमरदीप की मदद की मांग की। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले का संज्ञान लिया और खेल विभाग को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। अमरदीप का कहना है कि उन्होंने सरकारी नौकरी और नकद पुरस्कार के लिए कई बार आवेदन किया है, लेकिन अब तक उन्हें कोई ठोस सहायता नहीं मिली है। उनकी कहानी ने यह सवाल उठाया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को खेल के बाद आर्थिक सुरक्षा क्यों नहीं मिलती।
