क्या हैं यूपी में अखिलेश यादव के खिलाफ लगे विवादास्पद पोस्टर? जानें पूरी कहानी
राजनीतिक माहौल में गर्मी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। इस बार चर्चा का केंद्र नेताओं के बयान नहीं, बल्कि सड़कों और चौराहों पर लगे पोस्टर बन गए हैं। शुक्रवार की सुबह जब लोगों की नजर इन पोस्टरों पर पड़ी, तो राजनीतिक हलचल बढ़ गई। इन पोस्टरों के माध्यम से समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को निशाना बनाया गया है। खास बात यह है कि इन पोस्टरों में तुकबंदी वाले नारों और चित्रों का उपयोग कर तंज कसा गया है।
लखनऊ में चर्चित पोस्टर
लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज क्रॉसिंग के पास एक बड़ा पोस्टर चर्चा का विषय बना हुआ है। इसमें अखिलेश यादव की गोल टोपी पहने तस्वीर के साथ माफिया अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी की तस्वीरें भी शामिल की गई हैं। पोस्टर पर लिखा है, 'चाय, समोसा, रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई।' इस नारे के माध्यम से अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पर कटाक्ष किया गया है। इन पोस्टरों में प्रयुक्त चित्र और नारे इस तरह से तैयार किए गए हैं कि लोगों का ध्यान आसानी से आकर्षित कर सकें।
#WATCH | Lucknow, UP: Posters targeting the Samajwadi Party and party Chief Akhilesh Yadav have been put up at the National PG College crossing. https://t.co/k8krysTTP1
— News Media October 23, 2026
15 जिलों में फैले पोस्टर
ये पोस्टर केवल लखनऊ तक सीमित नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के लगभग 15 जिलों में अखिलेश यादव के खिलाफ ऐसे पोस्टर लगाए गए हैं। इनमें बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर जैसे जिले शामिल हैं। इन पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान की तस्वीरें भी दिखाई गई हैं।
इन पर लिखा गया है, 'सपाइयों का क्या भरोसा, चाय, समोसा, रसमलाई, सारे माफिया अपने भाई।' इन नारों के माध्यम से सपा के राजनीतिक रुख और उसके नेताओं पर सवाल उठाने का प्रयास किया गया है।
भर्ती परीक्षा और परिवारवाद पर तंज
पोस्टरों में समाजवादी पार्टी की पिछली सरकार के दौरान 2013 में हुई यूपी-पीसीएस भर्ती परीक्षा का भी उल्लेख किया गया है। इनमें दावा किया गया है कि 86 में से 56 पद एक विशेष जाति के लोगों को मिले थे। इस दावे के साथ पोस्टर पर लिखा है, 'रसगुल्ला और रसमलाई, एक जाति की सत्ता आई।' हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
साथ ही, सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए लिखा गया है, 'दाल, चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार।' पोस्टरों में अखिलेश यादव की इफ्तार पार्टी और सपा सरकार के दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगों का भी जिक्र किया गया है। इस संदर्भ में पोस्टर पर लिखा गया है, 'दंगा, इफ्तार और बिरयानी, सपा राज की असल कहानी।'
