नेपाल में बाढ़ के बाद जीवित बचने की अद्भुत कहानी: संजय और कबीर का संघर्ष
नेपाल में बाढ़ के बाद का चमत्कार
नई दिल्ली: नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद कई चमत्कारिक घटनाएं सामने आई हैं, जो मानवता की अदम्य इच्छाशक्ति और विश्वास को दर्शाती हैं। त्रिशूली-3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक गहरी सुरंग में 10 दिन बाद दो कर्मचारियों को नेपाली सेना और अंतरराष्ट्रीय बचाव दलों ने सुरक्षित निकाला। इनमें सप्तरी के संजय साह और काठमांडू के कबीर महारजन शामिल हैं। लगभग 240 घंटे तक मलबे में फंसे रहना उनके लिए किसी पुनर्जन्म से कम नहीं था।
संकट के समय में महामंत्र का जाप
सुरंग में बिना रोशनी और भोजन के बिताए गए दिन बेहद कठिन थे। संजय साह ने बताया कि उन्होंने इस कठिनाई के बीच अपनी मानसिक शक्ति बनाए रखने के लिए लगातार 'हरे कृष्ण महामंत्र' का जाप किया। इस मंत्र का जाप और ईश्वर में विश्वास ने उन्हें टूटने से बचाया। सुरंग की लंबाई के कारण वे केवल 3 से 4 साथियों की आवाज सुन पा रहे थे।
दूसरों की जान बचाने में खुद फंसे संजय
संजय प्रोजेक्ट के कंट्रोल रूम में कार्यरत थे, जहां हादसे के समय लगभग 40 से 45 लोग मौजूद थे। आमतौर पर वहां कम लोग होते हैं, लेकिन आपदा के समय भीड़ बढ़ गई थी। फोरमैन के रूप में, संजय ने दूसरों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन इस प्रयास में उनका अपना समय निकल गया। देखते ही देखते बाढ़ का पानी और मलबा सुरंग के मुहाने पर जमा हो गया और वे वहीं फंस गए।
कबीर महारजन का परिवार
कबीर महारजन, जो संजय के साथ सुरक्षित निकाले गए, पिछले सात वर्षों से त्रिशूली-3A प्रोजेक्ट में काम कर रहे थे। हादसे के दिन उनकी पत्नी हीरा शोभा से सुबह करीब 7:30 बजे आखिरी बार बात हुई थी। बाढ़ के बाद कबीर के सुरक्षित लौटने की खबर ने उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ा दी। हीरा ने बताया कि पिछले 10 दिन उनके लिए बेहद कठिन थे, लेकिन दिल में उम्मीद थी कि कबीर जिंदा लौटेंगे।
रेस्क्यू टीमों का प्रयास
शुक्रवार की सुबह, नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और अंतरराष्ट्रीय बचाव विशेषज्ञों के संयुक्त प्रयास से दोनों को सुरक्षित निकाला गया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि मानवता का साहस और दूसरों के प्रति समर्पण बड़े संकटों को भी पार कर सकता है। संजय साह का निस्वार्थता और 10 दिनों की कठिनाई अब नेपाल के इस संकट में उम्मीद और प्रेरणा का नया संदेश बन गई है।
