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बस्तर की महिलाओं ने फैशन शो में नक्सलवाद की छवि को किया ध्वस्त

रायपुर में आयोजित नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर एक अनोखा फैशन शो हुआ, जिसमें बस्तर की महिलाएं, जो पहले नक्सली संगठनों से जुड़ी थीं, ने रैंप पर चलकर अपनी नई पहचान बनाई। इस पहल का उद्देश्य न केवल पारंपरिक कपड़ों को बढ़ावा देना था, बल्कि आत्मसमर्पण कर चुकी महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना भी था। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने भी प्रतिभागियों से मुलाकात की और उन्हें शुभकामनाएं दीं। जानें इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में।
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नई दिल्ली में अनोखा फैशन शो


नई दिल्ली: रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित नेशनल हैंडलूम डे के अवसर पर एक विशेष फैशन शो ने सभी का ध्यान खींचा। इस बार रैंप पर पेशेवर मॉडल्स की बजाय बस्तर की वे महिलाएं थीं, जो पहले नक्सली संगठनों से जुड़ी थीं। इन महिलाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण किया और अब वे समाज में नई शुरुआत कर रही हैं।


रैंप वॉक की तस्वीरें और वीडियो वायरल

इस कार्यक्रम में महिलाओं ने कोसा सिल्क और पारंपरिक हथकरघा के परिधान पहनकर रैंप पर चलकर दर्शकों का दिल जीत लिया। आत्मविश्वास से भरी इन महिलाओं को देखकर दर्शकों ने तालियों से उनका उत्साह बढ़ाया। इस आयोजन की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए हैं।



नई पहचान की ओर कदम

इस पहल का उद्देश्य केवल पारंपरिक कपड़ों को बढ़ावा देना नहीं था, बल्कि आत्मसमर्पण कर चुकी महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करना और उन्हें समाज में सम्मान के साथ आगे बढ़ने का मंच देना भी था। बस्तर की इन महिलाओं के लिए रैंप पर चलना उनके पुराने जीवन से बाहर निकलकर एक नई पहचान बनाने का प्रयास है।


सरकारी सोशल मीडिया हैंडल MyGovIndia ने भी इस कार्यक्रम का वीडियो साझा किया है, जिसमें इन महिलाओं के जंगलों से रैंप तक पहुंचने की यात्रा को बदलाव और नई शुरुआत की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया गया है।



सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं

इस पहल पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कई यूजर्स ने इसे सामान्य जीवन की ओर लौटने का एक सकारात्मक उदाहरण बताया। एक यूजर ने कहा कि नक्सलवाद और हिंसा को सही ठहराना संभव नहीं है, लेकिन शांति और अपनी पसंद की जिंदगी चुनना असली बदलाव है।


मुख्यमंत्री की शुभकामनाएं

कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी प्रतिभागियों से मुलाकात की और उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। आयोजकों का कहना है कि इस पहल के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि अतीत चाहे जैसा भी हो, सही अवसर और सहयोग मिलने पर इंसान नई शुरुआत कर सकता है। बस्तर की इन महिलाओं की कहानी इसी बदलाव का प्रतीक है।