रूस में अंडरगार्मेंट्स पर अनोखा कानून: जानें इसके पीछे की वजह
अजीबोगरीब कानूनों की दुनिया
नई दिल्ली: विभिन्न देशों में अपनी संस्कृति और स्वास्थ्य के आधार पर कई अनोखे कानून बनाए गए हैं। जैसे कि सिंगापुर में च्युइंग गम पर प्रतिबंध है और कनाडा में बेबी वॉकर पर रोक है, उसी तरह रूस, बेलारूस और कजाकिस्तान में कुछ विशेष प्रकार के अंडरगार्मेंट्स की बिक्री पर सख्त पाबंदी है। 2013 में जब यह नियम लागू हुआ, तो यह गलतफहमी फैल गई कि वहां लेस या जालीदार फैब्रिक वाले फैशनेबल इनरवियर पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है। हालांकि, यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध किसी डिजाइन पर नहीं, बल्कि कपड़े के स्वास्थ्य मानकों के अनुपालन की कमी के कारण है।
हाइग्रोस्कोपिसिटी का महत्व
हाइग्रोस्कोपिसिटी क्या है?
इस कानून का मुख्य उद्देश्य कपड़ा उद्योग में 'हाइग्रोस्कोपिसिटी' यानी कपड़े की नमी सोखने की क्षमता का मानक स्थापित करना है। रूस के सरकारी स्वास्थ्य नियमों के अनुसार, केवल वही अंडरगार्मेंट्स बेचे जा सकते हैं जो कम से कम 6 प्रतिशत नमी सोखने का मानक पूरा करते हों।
उदाहरण के लिए, 100 प्रतिशत नायलॉन या घटिया सिंथेटिक से बने इनरवियर त्वचा का पसीना नहीं सोख पाते, जिससे त्वचा पर नमी बनी रहती है। इससे चिपचिपाहट, रैशेज, खुजली और बैक्टीरिया या फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
किस प्रकार के अंडरगार्मेंट्स की है अनुमति?
क्या बेचा जा सकता है?
रूसी बाजार में 100 प्रतिशत कॉटन से बने अंडरवियर और ब्रा के अलावा कॉटन और सिंथेटिक के मिश्रण वाले वस्त्र जैसे कॉटन-पॉलिएस्टर या कॉटन-नायलॉन की बिक्री की अनुमति है। फैशनेबल या लेस वाली ब्रा और पैंटी की बिक्री भी संभव है, बशर्ते उनमें अंदर की तरफ कॉटन की लाइनिंग (गसेट) हो और वे 6 प्रतिशत नमी सोखने के मानक पर खरे उतरते हों।
इस प्रकार, रूस का यह नियम फैशन या डिजाइन पर रोक लगाने के लिए नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य और स्वच्छता को प्राथमिकता देने के लिए बनाया गया है। यही कारण है कि कपड़ों का लैब टेस्ट पास होने के बाद ही उन्हें दुकानों तक पहुंचाया जाता है। यदि किसी कपड़े में पसीना या नमी सोखने की क्षमता 6 प्रतिशत से कम पाई जाती है, तो उसके निर्माण और बिक्री पर कानूनी रोक लगाई जाती है।
