संभल की अनोखी बोन क्राफ्ट: भैंस की हड्डियों से बनती हैं बेशकीमती सजावटी वस्तुएं
संभल का हस्तशिल्प उद्योग
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश का संभल जिला इन दिनों अपनी अनोखी हस्तशिल्प कला के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। यहां भैंस की हड्डियों और सींगों को वैज्ञानिक और पारंपरिक तरीकों से संसाधित कर सुंदर सजावटी वस्तुएं बनाई जा रही हैं। इस कला की वैश्विक मांग इतनी बढ़ गई है कि इसे प्रदेश सरकार की वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट योजना में शामिल किया गया है। इससे संभल के सैकड़ों परिवारों के लिए यह व्यवसाय करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक महत्वपूर्ण साधन बन गया है।
निर्माण प्रक्रिया की जटिलता
कास्टिक सोडे के घोल में 8 घंटे की खौलती प्रक्रिया
इस अद्भुत 'बोन क्राफ्ट' के निर्माण की प्रक्रिया बेहद दिलचस्प है। सबसे पहले, विक्रेताओं से भैंस की हड्डियां और सींग खरीदे जाते हैं। इसके बाद, बड़े बर्तनों में पानी और कास्टिक सोडा मिलाकर हड्डियों को 8 घंटे तक उबाला जाता है। इस प्रक्रिया से हड्डियों की सारी गंदगी और चिकनाई साफ हो जाती है। सूखने के बाद, कारीगर इन हड्डियों को छोटे टुकड़ों में काटते हैं।
कलात्मकता का प्रदर्शन
घिसाई के बाद सफेद मार्बल जैसा लुक
कटाई के बाद असली कला का काम शुरू होता है। इन टुकड़ों को विशेष मशीनों पर रगड़कर इतना चिकना बनाया जाता है कि वे सफेद संगमरमर जैसे दिखने लगते हैं। इसके बाद, कुशल कारीगर इनसे फोटो फ्रेम, कंघियां, पेन होल्डर, आभूषण बॉक्स, बटन और सजावटी पॉट तैयार करते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इन हस्तनिर्मित उत्पादों की कीमत साधारण प्लास्टिक या लकड़ी के सामान से कई गुना अधिक होती है।
वैश्विक मांग और निर्यात
जर्मनी और अमेरिका से मिलते हैं बड़े ऑर्डर्स
संभल के निर्माताओं को सीधे विदेशी ग्राहकों से ऑर्डर नहीं मिलते, बल्कि दिल्ली और मुंबई के बड़े एक्सपोर्टर्स के माध्यम से जर्मनी, इंग्लैंड, अमेरिका और अन्य यूरोपीय देशों से कस्टमाइज्ड ऑर्डर प्राप्त होते हैं। इस प्रक्रिया में कोई भी कचरा बर्बाद नहीं होता। हड्डियों की घिसाई से निकलने वाला बुरादा जैविक खेती के लिए बेहतरीन खाद का काम करता है, जिसे किसान ऊंचे दामों पर खरीदते हैं।
