हैदराबाद के स्टार्टअप फाउंडर की प्रेरणादायक कहानी: टैक्सी ड्राइवर से प्रोक्योरमेंट हेड तक का सफर
एक अनोखी सफलता की कहानी
नई दिल्ली: हैदराबाद के एक स्टार्टअप के सह-संस्थापक श्रवंत गजुला की कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने लिंक्डइन पर एक पुरानी घटना साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी में पहले कर्मचारी के रूप में एक टैक्सी ड्राइवर को नौकरी दी गई थी, जो केवल 9वीं कक्षा तक पढ़ा था और अंग्रेजी नहीं जानता था।
फैसले पर उठे सवाल
गजुला ने बताया कि उस समय कई लोगों ने उनके इस निर्णय पर सवाल उठाए थे। लेकिन उन्हें उस व्यक्ति में मेहनत करने की इच्छा, ईमानदारी और नई चीजें सीखने का जज्बा नजर आया। उनका मानना है कि किसी की क्षमता केवल उसकी डिग्री या रिज्यूमे से नहीं मापी जा सकती।
सीखने के अवसर प्रदान करना
गजुला ने कहा कि उनकी कंपनी ने उस कर्मचारी को आगे बढ़ने के लिए आवश्यक अवसर प्रदान किए। उसे स्पोकन इंग्लिश की ट्रेनिंग दी गई और उसे जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिससे वह अपनी क्षमताओं को विकसित कर सके। समय के साथ, वह कर्मचारी कंपनी में तरक्की करता गया और अब वह प्रोक्योरमेंट विभाग का नेतृत्व कर रहा है। गजुला ने इसे अपने सबसे अच्छे निर्णयों में से एक बताया है।
प्रतिभा में निवेश
‘प्रतिभा को मौका देना ही असली निवेश’
गजुला ने अपनी पोस्ट में कहा कि कंपनियां अक्सर संस्कृति और कर्मचारियों को महत्व देने की बात करती हैं, लेकिन असली मूल्य तब सामने आता है जब किसी ऐसे व्यक्ति पर भरोसा किया जाए जिसे अन्य लोग नजरअंदाज कर चुके हों। उनके अनुसार, किसी की क्षमता को पहचानने से पहले उस पर विश्वास करना एक प्रकार का निवेश है। उन्होंने अन्य संस्थापकों को सलाह दी कि वे लोगों की वर्तमान स्थिति के बजाय उनकी संभावनाओं पर ध्यान दें।
सोशल मीडिया पर सराहना
गजुला के इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने उनकी सराहना की। लोगों ने कहा कि स्किल्स समय के साथ सीखी जा सकती हैं, लेकिन ईमानदारी, जिम्मेदारी और सीखने की इच्छा जैसे गुण बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। कई यूजर्स ने इसे नेतृत्व का एक बेहतरीन उदाहरण बताया और कहा कि अच्छे लीडर केवल कंपनियां नहीं बनाते, बल्कि लोगों को आगे बढ़ने का मौका देकर उनकी जिंदगी भी बदलते हैं।
