अधिकमास के बाद शुभ कार्यों की शुरुआत: जानें विवाह के मुहूर्त
अधिकमास का समापन
अधिकमास, जिसे मलमास भी कहा जाता है, का समय समाप्त हो चुका है। यह विशेष महीना हर तीन साल में एक बार आता है, और इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते। अब जब यह महीना खत्म हो गया है, तो सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत होने जा रही है। मलमास में केवल ईश्वर की भक्ति और दान-पुण्य के कार्य किए जाते हैं।
शुभ कार्यों की शुरुआत कब?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, अधिकमास या पुरुषोत्तम मास के दौरान विवाह जैसे महत्वपूर्ण मांगलिक कार्यों पर रोक लगाई जाती है। ज्योतिषियों का मानना है कि यह महीना भगवान विष्णु की भक्ति के लिए समर्पित है। इस समय पूजा-पाठ और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है, लेकिन विवाह, गृह प्रवेश या मुंडन जैसे कार्यों पर रोक होती है।
शादियों का सीजन
अधिकमास की समाप्ति 15 जून को हो चुकी है, और इसके बाद सभी मंगल कार्य फिर से शुरू हो गए हैं। चारों ओर उत्सव का माहौल है। 19 जून से शादियों का सीजन शुरू हो रहा है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस बार विवाह के लिए परिवारों को सीमित समय मिलेगा। 19 जून से लेकर महीने के अंत तक कुल 9 शुभ मुहूर्त विवाह के लिए निर्धारित किए गए हैं।
शादी-विवाह के शुभ मुहूर्त
यदि आप जून में शादी करने की योजना बना रहे हैं, तो ये तिथियाँ शुभ मानी जा रही हैं: 19, 20, 23, 24, 25, 26, 27, 28 और 29 जून। इन तिथियों में फेरे लेना दूल्हा-दुल्हन के वैवाहिक जीवन के लिए सुखद और मंगलकारी रहेगा।
शादियों के बाद का समय
जून के बाद जुलाई में भी केवल 12 तारीख तक ही शादी के मुहूर्त हैं। इस वेडिंग सीजन के बाद, शुभ कार्यों पर फिर से 4 महीने का लंबा ब्रेक लगेगा। 25 जुलाई से चातुर्मास की शुरुआत होगी, जो 21 नवंबर तक चलेगा।
धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और पाताल लोक में विश्राम करते हैं। इस अवधि में शादी, मुंडन या नया घर खरीदना मना होता है।
