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कामिका एकादशी: महत्व, तिथि और पूजा विधि

कामिका एकादशी हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण तिथि है, जो सावन माह के कृष्ण पक्ष में आती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। व्रत करने से सभी पाप समाप्त होते हैं और विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। जानें इस एकादशी की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में, जिससे आप इस दिन का सही तरीके से पालन कर सकें।
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कामिका एकादशी का महत्व

हिंदू धर्म में कामिका एकादशी का एक विशेष स्थान है। यह एकादशी तिथि सावन माह के कृष्ण पक्ष में आती है, जिसे हिंदू पंचांग के अनुसार मनाया जाता है। सावन का महीना भगवान शिव के लिए अत्यंत प्रिय माना जाता है, और इस दौरान एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है।


एकादशी व्रत का महत्व

कामिका एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और मृत्यु के बाद उसे विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा स्नान, काशी, गया, पुष्कर और कुरुक्षेत्र जैसे तीर्थों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। आइए, अब जानते हैं कामिका एकादशी की तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।


तिथि और मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 08 अगस्त 2026 को दोपहर 01:59 बजे से शुरू होगी। यह तिथि 09 अगस्त की सुबह 11:04 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, कामिका एकादशी का व्रत 09 अगस्त 2026 को रखा जाएगा, और इसका पारण 10 अगस्त को सुबह 05:47 से 08:00 बजे तक किया जाएगा।


पूजन विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें। भगवान विष्णु को पंचामृत और जल से स्नान कराएं, फिर हल्दी और चंदन लगाएं। इसके बाद पीले फूल, तुलसी के पत्ते और भोग अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर भगवान विष्णु से प्रार्थना करें। इसके बाद विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें और एकादशी व्रत कथा सुनें। अगले दिन व्रत का पारण करें।


मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।


ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात।


ॐ श्रीं श्री लक्ष्मी-नारायणाभ्यां नमः।


ॐ विष्णवे नमः।