Newzfatafatlogo

गणेश चतुर्थी 2026: भगवान गणेश और मूलाधार चक्र का संबंध

गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर से शुरू हो रहा है, जिसमें भक्त भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इस लेख में भगवान गणेश और मूलाधार चक्र के बीच के संबंध को समझाया गया है। गणेश जी को बुद्धि और विवेक का देवता माना जाता है, और उनका संबंध मानव शरीर के चक्रों से जुड़ा है। जानें कैसे यह पर्व स्थिरता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है।
 | 

गणेश चतुर्थी का पर्व

नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी का उत्सव 2026 में 14 सितंबर से प्रारंभ होने जा रहा है। इस अवसर पर भक्तजन अपने घरों और पूजा पंडालों में भगवान गणेश की स्थापना कर उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक और नई शुरुआत का देवता माना जाता है। आध्यात्मिक परंपराओं में उनका संबंध मानव शरीर के मूलाधार चक्र से भी जोड़ा गया है।


मानव शरीर के चक्र

योग और आध्यात्मिक परंपरा के अनुसार, मानव शरीर में सात प्रमुख चक्र होते हैं, जिन्हें मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपुर, अनाहत, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्रार कहा जाता है। ये चक्र आध्यात्मिक रूप से शरीर, मन और चेतना के विभिन्न स्तरों से जुड़े होते हैं, जिनमें मूलाधार चक्र सबसे पहला होता है।


मूलाधार चक्र की स्थिति

मूलाधार चक्र रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में स्थित होता है। इसका अर्थ जीवन का मूल आधार है। आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार, यह चक्र स्थिरता, सुरक्षा, आधार और जीवन शक्ति से संबंधित है। इसलिए भगवान गणेश को मूलाधार चक्र का अधिष्ठाता देवता माना जाता है।


भगवान गणेश और मूलाधार चक्र

भगवान गणेश और मूलाधार चक्र के बीच संबंध को प्रतीकात्मक रूप से समझा जाता है। गणेश जी को विघ्नहर्ता, यानी बाधाओं को दूर करने वाला देवता माना जाता है। मूलाधार चक्र को शरीर और चेतना का आधार माना जाता है, इसलिए किसी भी नई शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करने की परंपरा को मूलाधार की स्थिरता से जोड़ा जाता है।


योग परंपरा में मान्यता

योग परंपरा में कुंडलिनी शक्ति के जागरण की यात्रा मूलाधार से शुरू होती है। आध्यात्मिक साधना में ध्यान और योग के माध्यम से चेतना को ऊपरी चक्रों की ओर ले जाने की बात कही जाती है। इस दृष्टिकोण से गणेश आराधना को साधक के भीतर स्थिरता, सुरक्षा और मानसिक संतुलन स्थापित करने वाली साधना के रूप में देखा जाता है।


आध्यात्मिक परंपराओं की दृष्टि

यह ध्यान रखना आवश्यक है कि चक्रों और उनके देवताओं से जुड़ी बातें योग और आध्यात्मिक परंपराओं की मान्यताओं का हिस्सा हैं। आधुनिक विज्ञान इन्हें शारीरिक अंगों या ऊर्जा केंद्रों के रूप में स्वीकार नहीं करता। इसलिए इसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझना उचित है।


गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की पूजा का संदेश केवल बाहरी पूजा तक सीमित नहीं है। आध्यात्मिक दृष्टि से यह अपने भीतर स्थिरता, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने का प्रतीक है। यही कारण है कि गणेश जी को शुभ शुरुआत और बाधाओं को दूर करने वाला देवता मानकर सबसे पहले उनकी आराधना की जाती है।