ज्योतिष में जन्म तिथियों का महत्व और फलादेश
ज्योतिष शास्त्र में जन्म तिथियों का विशेष महत्व है। यह लेख विभिन्न तिथियों जैसे नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा के फलादेश के बारे में जानकारी प्रदान करता है। जानें कि आपकी जन्म तिथि आपके स्वभाव और जीवन पर कैसे प्रभाव डालती है। क्या आप जानते हैं कि आपकी तिथि जन्म से आपके व्यक्तित्व के बारे में क्या कहती है? इस लेख में जानें!
| Jun 27, 2026, 11:22 IST
जन्म तिथि के माध्यम से ज्योतिष का ज्ञान
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, किसी व्यक्ति की जन्म तिथि से उनके जीवन के कई पहलुओं का पता लगाया जा सकता है। हर व्यक्ति की जन्म तिथि का विशेष महत्व होता है, जो ज्योतिषीय ग्रंथों में विस्तृत रूप से वर्णित है। जैसे कि प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, पूर्णमासी और अमावस्या, इन तिथियों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
ज्योतिष के अनुसार, प्रतिपदा, षष्ठी और एकादशी तिथियों को नंदा कहा जाता है, जबकि चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी को रिक्ता तिथि माना जाता है। पंचमी, दशमी, पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि, अमावस्या को विद्वान पूर्णा तिथि मानते हैं। इस लेख में, हम इन तिथियों पर जन्मे व्यक्तियों के स्वभाव के बारे में चर्चा करेंगे।
नन्दा तिथियों का फलादेश
जानें नन्दा आदि तिथियों का फलादेश
यदि किसी व्यक्ति का जन्म नन्दा तिथियों जैसे प्रतिपदा, षष्ठी या एकादशी में से किसी एक पर होता है, तो ज्योतिष के अनुसार वह व्यक्ति ज्ञानी, पंडित, देवताओं का भक्त और अपने परिवार के प्रति प्रेम रखने वाला होता है।
भद्रा तिथि का प्रभाव
भद्रा तिथि
यदि किसी व्यक्ति का जन्म भद्रा तिथियों जैसे द्वितीया, सप्तमी या द्वादशी में से किसी पर होता है, तो वह धनवान, संसार के बंधनों से डरने वाला और परोपकार में रुचि रखने वाला होता है।
जया तिथि का महत्व
जया तिथि
जिनका जन्म जया तिथि यानी तृतीया, अष्टमी या त्रयोदशी को होता है, उन्हें जीवन में मान-सम्मान प्राप्त होने की संभावना होती है। ऐसे लोग साहसी, शांत स्वभाव के और लंबी उम्र के माने जाते हैं। उन्हें संतान सुख भी मिलता है और वे अपने बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में सफल होते हैं।
रिक्ता तिथि का फलादेश
रिक्ता तिथि
यदि किसी जातक का जन्म रिक्ता तिथियों जैसे चतुर्थी, नवमी या चतुर्दशी में से किसी पर होता है, तो वह व्यक्ति तर्कशील, लापरवाह और गुरु की निंदा करने वाला होता है। इसके अलावा, वह दूसरों के घमंड को नष्ट करने वाला और अत्यधिक वासना वाला होता है।
पूर्णा तिथि का प्रभाव
पूर्णा तिथि
जिस व्यक्ति का जन्म पूर्णा तिथि यानी पंचमी, दशमी, पूर्णिमा या अमावस्या में से किसी एक पर होता है, उसे धन-धान्य की कमी नहीं होती। वह वेद और शास्त्रों का ज्ञाता होता है, सत्य बोलने वाला और अनेक विषयों का जानकार होता है।
