दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के लिए सही समय और सामग्री
दिवाली का त्योहार और इसकी तैयारी
दिवाली का पर्व आते ही घरों में एक विशेष उत्साह देखने को मिलता है। सफाई, रंगोली और दीप जलाने की तैयारियों में हर कोई व्यस्त रहता है। इस दिन हर परिवार का प्रयास होता है कि मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा विधिपूर्वक की जाए। हिंदू धर्म के अनुसार, दिवाली की रात लक्ष्मी पूजन से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। इसलिए, लोग इस दिन पूजा के लिए शुभ समय का विशेष ध्यान रखते हैं।
लक्ष्मी पूजन के लिए महत्वपूर्ण समय
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार, दिवाली पर लक्ष्मी पूजन का मुख्य शुभ समय शाम 5:54 बजे से रात 7:50 बजे तक है, जिसे वृषभ काल कहा जाता है। प्रदोष काल शाम 5:31 बजे से रात 8:09 बजे तक रहेगा। निशिता काल रात 11:49 बजे से 12:41 बजे तक है, जिसे विशेष धार्मिक पूजा के लिए शुभ माना जाता है।
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री
लक्ष्मी पूजन आरंभ करने से पहले सभी आवश्यक वस्तुओं को एकत्र कर लें। इसमें मां लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर जी की मूर्ति या तस्वीर, कलश, गंगाजल, नारियल, सुपारी, सिक्का और आम या अशोक के पांच पत्ते शामिल करें। इसके अलावा, रोली, चंदन, अक्षत, कलावा, लाल या पीला कपड़ा, फूल, धूप, अगरबत्ती, घी के दीपक, फल और मिठाई भी तैयार रखें।
पूजा की शुरुआत कैसे करें
पूजा की प्रक्रिया की शुरुआत पूजा स्थल की सफाई से करें। इसके बाद वहां गंगाजल छिड़कें और हाथ में जल, फूल तथा अक्षत लेकर पूजा का संकल्प लें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर कलश स्थापित करें। कलश में जल, सुपारी, सिक्का और अक्षत डालें। इसके ऊपर आम के पत्ते और नारियल रखें। फिर भगवान गणेश, मां लक्ष्मी और कुबेर जी की मूर्तियां स्थापित करें।
मां लक्ष्मी की पूजा का सरल तरीका
पूजा की शुरुआत गणेश जी को रोली, अक्षत, दूर्वा और फूल चढ़ाकर करें। उन्हें लड्डू या मोदक का भोग अर्पित करें। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा करें और उन्हें फूल, चंदन, कुमकुम, सिंदूर और मिठाई अर्पित करें। यदि आप व्यापार करते हैं, तो अपने बही खाते, लैपटॉप या अन्य आवश्यक वस्तुओं को भी पूजा में शामिल कर सकते हैं। अंत में, मां लक्ष्मी के समक्ष घी का दीपक जलाएं।
