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देवशयनी एकादशी: महत्व और लाभ

देवशयनी एकादशी, जो 25 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी, हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है। इस दिन भगवान विष्णु की योगनिद्रा और चातुर्मास की शुरुआत होती है। व्रत करने से भक्तों को कई आध्यात्मिक लाभ मिलते हैं, जैसे पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति। जानें इस व्रत के नियम और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताएँ।
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देवशयनी एकादशी का महत्व

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में हर एकादशी का विशेष महत्व होता है, लेकिन आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इस वर्ष यह व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं और चातुर्मास की शुरुआत होती है। इस अवसर पर भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, नियम और संयम के साथ किया गया देवशयनी एकादशी का व्रत विशेष पुण्यदायी होता है। इस दिन पूजा, दान और व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा और माता लक्ष्मी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत से जुड़े आध्यात्मिक लाभों का उल्लेख शास्त्रों और पुराणों में मिलता है।


25 जुलाई को होगा देवशयनी एकादशी व्रत

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष देवशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण 26 जुलाई 2026 को किया जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विधिपूर्वक पूजन करने की परंपरा है। श्रद्धालु इस दिन सुख, समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह तिथि चातुर्मास की शुरुआत का दिन भी मानी जाती है।


व्रत के प्रमुख लाभ

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को कई शुभ फल मिलते हैं। इनमें पापों से मुक्ति, भगवान विष्णु का आशीर्वाद, मोक्ष की प्राप्ति, पुण्य लाभ और घर में सुख-शांति का वास शामिल हैं। इसके अलावा, व्रत और पूजा से मन की एकाग्रता बढ़ने और आत्मसंयम विकसित होने की भी मान्यता है।


पद्म पुराण में पुण्य का महत्व

धार्मिक ग्रंथों, विशेषकर पद्म पुराण के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, स्नान और दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की आराधना कर अपने जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं। यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति का भी माध्यम माना जाता है।


एक नियम का पालन आवश्यक

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन तुलसी के पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि तुलसी माता लक्ष्मी का स्वरूप हैं और इस दिन वे स्वयं व्रत करती हैं। इसलिए इस दिन तुलसी को स्पर्श करने से बचने की परंपरा बताई गई है। श्रद्धालु इस नियम का पालन श्रद्धा और विश्वास के साथ करते हैं।


श्रद्धा और नियमों के साथ करें व्रत

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी का व्रत तभी फलदायी माना जाता है जब इसे श्रद्धा, संयम और विधि विधान के साथ किया जाए। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा, दान पुण्य तथा सात्विक जीवनशैली अपनाने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सच्चे मन से किया गया यह व्रत जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।