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नीरपथूर महादेव मंदिर: केरल का अनोखा शिवलिंग

नीरपथूर महादेव मंदिर, केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित एक अद्वितीय धार्मिक स्थल है, जहां भगवान शिव का शिवलिंग सालभर पानी में डूबा रहता है। यह मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और खूबसूरत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मॉनसून में यहां का दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है। जानें इस मंदिर की विशेषताएँ, यहां मनाए जाने वाले त्योहार, और कैसे पहुंचें।
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नीरपथूर महादेव मंदिर की विशेषताएँ

भारत में महादेव के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जो अपनी अनोखी परंपराओं और रहस्यमय विशेषताओं के लिए जाने जाते हैं। इनमें से एक है केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित नीरपथूर महादेव मंदिर। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव का शिवलिंग सालभर पानी में डूबा रहता है, जिससे भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं।


मॉनसून में मंदिर का सौंदर्य

मॉनसून के दौरान, मंदिर का दृश्य अत्यंत मनमोहक हो जाता है। सावन में यहां की हरियाली और बारिश का मौसम मंदिर की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देता है। कहा जाता है कि यह मंदिर लगभग 3,000 वर्ष पुराना है।


मंदिर का स्थान

कहां है ये मंदिर

भगवान शिव का यह मंदिर केरल के मलप्पुरम जिले के पुथूर गांव में स्थित है। नीरपथूर महादेव मंदिर का संचालन मालाबार देवस्वम बोर्ड द्वारा किया जाता है, और यहां हर साल बड़ी संख्या में भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए आते हैं।


गर्भगृह की विशेषता

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत

नीरपथूर महादेव मंदिर का गर्भगृह इसकी सबसे बड़ी विशेषता है, जहां महादेव शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं। यहां सालभर गर्भगृह में पानी भरा रहता है, जिससे यह मंदिर केरल के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में से एक बन जाता है।


स्वयंभू शिवलिंग

हमेशा पानी में रहता है शिवलिंग

यह माना जाता है कि मंदिर में स्थित शिवलिंग स्वयंभू है, जो अपने आप प्रकट हुआ था। गर्भगृह में भरा यह पवित्र जल मां गंगा का प्रतीक है।


दर्शन का महत्व

क्यों खास होते हैं यहां के दर्शन

नीरपथूर महादेव मंदिर के चारों ओर हरियाली फैली रहती है, और गर्भगृह में मौजूद पानी का दृश्य अत्यंत सुंदर होता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं, और भारी बारिश के कारण पानी का स्तर बढ़ने पर दर्शन की व्यवस्था में बदलाव किया जाता है।


त्योहारों का आयोजन

यहां मनाए जाते हैं ये त्योहार

नीरपथूर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इसके अलावा, सहस्र दीपम भी यहां का प्रमुख उत्सव है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त आते हैं और दीपक की रोशनी से पूरा परिसर जगमगा उठता है।


मंदिर की संरचना

मंदिर की बनावट

यह मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि अपनी अनोखी संरचना के कारण भी विशेष है। अधिकांश मंदिरों में गर्भगृह सूखा रहता है, जबकि यहां शिवलिंग सालभर पानी से भरा रहता है।


कैसे पहुंचे

ऐसे पहुंचे

आप हवाई जहाज से यहां पहुंच सकते हैं, क्योंकि कालीकट का अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा मंदिर से लगभग 60 किमी दूर है। यदि आप ट्रेन से आना चाहते हैं, तो तिरूर रेलवे स्टेशन मंदिर से 60.7 किमी दूर है। बस से आने के लिए, पेरिंथलमन्ना KSRTC बस डिपो मंदिर से करीब 25.9 किमी दूर है।


ध्यान रखने योग्य बातें

इन बातों का रखें ध्‍यान

बारिश के मौसम में फिसलन से बचने के लिए आरामदायक जूते पहनें। मंदिर के अंदर जाने से पहले वहां के सभी नियमों का पालन करें और दर्शन तथा पूजा के दौरान शांति बनाए रखें। यदि आप मॉनसून में यहां जा रहे हैं, तो पहले मौसम की जानकारी ले लें।