महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं: शिवमहापुराण के अनुसार
भगवान शिव की आराधना से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
नई दिल्ली: भगवान शिव की पूजा को लेकर कई प्रश्न उठते हैं, जिनमें से एक प्रमुख यह है कि क्या महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं और क्या इसे घर में रखना सही है। इस विषय पर विभिन्न मान्यताएं हैं, लेकिन शिवमहापुराण में इस पर स्पष्ट उल्लेख मिलता है। इस ग्रंथ के अनुसार, महिलाओं को शिवलिंग की पूजा करने का अधिकार है। इसके अलावा, घर में शिवलिंग स्थापित करने की अनुमति भी है, बशर्ते उसकी नियमित और विधिपूर्वक पूजा की जाए।
महिलाओं की पूजा के अधिकार पर क्या कहा गया है?
शिवमहापुराण में कहा गया है कि महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती हैं। हालांकि, यदि किसी महिला के घर में संतान का जन्म हुआ है और वह भगवान शिव की नियमित उपासक हैं, तो उन्हें सूतक काल के दस दिनों तक मानसिक रूप से शिव का स्मरण करना चाहिए। इसके बाद, कुल परंपरा के अनुसार पुनः शिवलिंग की पूजा की जा सकती है।
शिवमहापुराण में उदाहरणों का उल्लेख
इस ग्रंथ में यह भी बताया गया है कि भगवान की पूजा का अधिकार सभी को है। इसमें माता लक्ष्मी द्वारा पार्थिव शिवलिंग की पूजा का प्रसंग और माता पार्वती की कठोर तपस्या का वर्णन है, जिसके फलस्वरूप उन्हें भगवान शिव पति के रूप में प्राप्त हुए। ये प्रसंग शिवभक्ति के महत्वपूर्ण उदाहरण माने जाते हैं।
घुश्मा की कथा का उल्लेख
शिवमहापुराण में घुश्मा नाम की एक महिला का उल्लेख है, जो प्रतिदिन भगवान शिव की आराधना करती थीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने वरदान देने की इच्छा जताई। घुश्मा ने प्रार्थना की कि भगवान उसी स्थान पर उनके नाम से विराजमान होकर भक्तों का कल्याण करें। इसके बाद वहां घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग की प्रतिष्ठा होने का उल्लेख मिलता है।
क्या घर में शिवलिंग रखना उचित है?
शिवमहापुराण के अनुसार, घर में शिवलिंग स्थापित किया जा सकता है। ग्रंथ में कहीं भी ऐसा उल्लेख नहीं है कि घर में शिवलिंग रखना वर्जित है। यदि घर में शिवलिंग स्थापित किया जाए, तो उसकी प्रतिदिन नियमपूर्वक और श्रद्धा के साथ पूजा करने का विधान बताया गया है।
कौन से शिवलिंगों का उल्लेख किया गया है?
शिवमहापुराण में ब्रह्माजी के कथन के अनुसार, घर में सोने, चांदी, मिट्टी या अन्य धातुओं से बने शिवलिंग स्थापित किए जा सकते हैं। इनकी विधिपूर्वक पूजा करने का भी उल्लेख है। ग्रंथ में शिवभक्ति को आस्था और नियमित उपासना से जोड़कर बताया गया है।
