Newzfatafatlogo

रक्षा बंधन: भाई-बहन के रिश्ते का पवित्र पर्व और भद्रा का महत्व

रक्षा बंधन भाई-बहन के रिश्ते का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जिसमें बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं। इस लेख में भद्रा काल का महत्व, पौराणिक कथाएं और 2026 में रक्षा बंधन की तिथि के बारे में जानकारी दी गई है। जानें कि इस बार भद्रा का साया नहीं रहेगा और राखी बांधने का सही समय क्या होगा।
 | 

रक्षा बंधन का महत्व


नई दिल्ली: रक्षा बंधन एक ऐसा त्योहार है जो भाई-बहन के रिश्ते को समर्पित है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी बांधने का समय बहुत महत्वपूर्ण होता है।


भद्रा काल का महत्व

इसलिए, रक्षा बंधन के दिन भद्रा काल में राखी बांधने से बचने की सलाह दी जाती है। हिंदू धर्म में भद्रा काल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस दिन भी भद्रा काल में रक्षासूत्र बांधने से बचने की परंपरा है, जिसके पीछे एक पौराणिक कथा है।


पौराणिक कथा

क्या है लोकप्रिय कथा?


कथा के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने भद्रा काल में अपने भाई को राखी बांधी थी, जिसके बाद रावण का विनाश हुआ। इसी कारण से यह मान्यता बनी कि भद्रा के समय राखी बांधना शुभ नहीं होता।


हालांकि, यह कथा धार्मिक मान्यता और लोक परंपरा का हिस्सा है, इसे ऐतिहासिक प्रमाण नहीं माना जाता।


भद्रा का परिचय

कौन हैं भद्रा?


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा सूर्य देव की पुत्री और न्याय के देवता शनि देव की बहन मानी जाती हैं। कहा जाता है कि भद्रा का स्वभाव उग्र था, जिससे शुभ कार्यों में बाधा आती थी। इसी कारण से पंचांग में भद्रा काल को ध्यान में रखकर कई मांगलिक कार्यों का समय निर्धारित किया जाता है।


रक्षा बंधन 2026 की तिथि

रक्षा बंधन 2026 कब है?


वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा की तिथि 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से शुरू होगी और 28 अगस्त को सुबह 9:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार, रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा।


भद्रा का प्रभाव

इस बार नहीं रहेगा भद्रा का साया


इस वर्ष रक्षा बंधन पर भद्रा का कोई लंबा व्यवधान नहीं होगा। पंचांग के अनुसार, 28 अगस्त को सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय है। हालांकि, विभिन्न स्थानों पर सूर्योदय और पंचांग गणना में भिन्नता के कारण मुहूर्त में बदलाव संभव है। इसलिए, स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।


रक्षा बंधन पर बहनों को राखी बांधने से पहले तिलक और आरती की परंपरा निभानी चाहिए। इसके बाद शुभ समय में रक्षासूत्र बांधकर भाई की सुख समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की जाती है।