श्रावण मास की चतुर्थी: गजानन संकष्टी चतुर्थी का महत्व और पूजा विधि
आज, 2 अगस्त 2026 को श्रावण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो गजानन संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाई जा रही है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। जानें आज के पंचांग की जानकारी, शुभ और अशुभ समय, और गणेश जी की पूजा विधि। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कैसे इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
| Aug 2, 2026, 10:59 IST
आज का पंचांग
आज, 2 अगस्त 2026, रविवार को श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो रात 11:15 बजे तक रहेगी। इस दिन गजानन संकष्टी चतुर्थी का पर्व भी मनाया जा रहा है, जो भगवान गणेश को समर्पित है। आइए, आज के पंचांग के बारे में जानते हैं।
पंचांग की जानकारी
आज सूर्य कर्क राशि में हैं, जबकि चंद्रमा दोपहर 3:26 बजे तक कुंभ में रहेगा और फिर मीन राशि में प्रवेश करेगा। आज पूर्वभाद्रपद नक्षत्र है। शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 से 12:54 बजे तक और अमृत काल दोपहर 1:19 से 2:59 बजे तक रहेगा। राहुकाल शाम 5:30 से 7:11 बजे तक है।
पंचांग के महत्वपूर्ण विवरण
तिथि: कृष्ण चतुर्थी (रात 11:15 बजे तक)
मास: श्रावण
दिन: रविवार
संवत्: 2083
योग: अतिगण्ड (रात 10:30 बजे तक), फिर सुकर्मा
करण: बव (प्रातः 11:14 बजे तक), बालव (रात 11:15 बजे तक, फिर कौलव)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति
सूर्योदय: 05:43 बजे
सूर्यास्त: 07:11 बजे
चंद्रोदय: 09:24 बजे
चंद्रास्त: 08:52 बजे (03 अगस्त)
आज के शुभ और अशुभ समय
अभिजीत मुहूर्त: 12:00 से 12:54 बजे
अमृत काल: 01:19 से 02:59 बजे
राहुकाल: 05:30 से 07:11 बजे
गुलिकाल: 03:49 से 05:30 बजे
यमगण्ड: 12:27 से 02:08 बजे
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026
चंद्रोदय समय: 09:24 बजे
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 01 अगस्त, रात 11:07 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 02 अगस्त, रात 11:15 बजे
गणेश पूजा की विधि
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
- घर के मंदिर की सफाई करें और एक लकड़ी की चौकी पर लाल या हरा कपड़ा बिछाएं।
- चौकी पर गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और मंगल कलश रखें।
- गणेश जी की मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं, फिर साफ जल से स्नान कराएं।
- बप्पा को वस्त्र, जनेऊ, चंदन का तिलक, धूप-दीप और फूल अर्पित करें।
- दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें और मोदक तथा गुड़ का भोग लगाएं।
- गणपति मंत्रों का जप करें और श्रद्धा से आरती गाएं।
- अंत में सभी को प्रसाद वितरित करें।
