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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: उत्सव की तैयारी और पूजा विधि

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है, जिसमें भक्त उपवास रखते हैं और रात में लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं। जानें इस पर्व की पूजा विधि, आवश्यक सामग्री और मंत्रों के बारे में।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व


नई दिल्ली: आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। यह त्योहार भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव है। जन्माष्टमी को विभिन्न नामों जैसे कृष्णाष्टमी, गोकुलाष्टमी, कृष्ण जयंती और श्रीकृष्ण जयंती से भी जाना जाता है।


भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाए जाने वाले इस पर्व पर भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और रात में भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप लड्डू गोपाल की पूजा करते हैं।


श्रीकृष्ण का जन्म कब होगा?

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे शुरू होकर 5 सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। भगवान श्रीकृष्ण की पूजा के लिए आज रात 11:57 बजे से 12:42 बजे तक का समय शुभ रहेगा। इस दौरान भक्त लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव मनाएंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, जो इस बार रात 12:29 बजे से रात 11:04 बजे तक रहेगा।


जन्माष्टमी पूजा के लिए आवश्यक सामग्री

लड्डू गोपाल की पूजा के लिए बाल कृष्ण की मूर्ति, झूला, नए कपड़े, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, चंदन, रोली, अक्षत, दीपक, धूप, कपूर और फूल की आवश्यकता होती है। भगवान के अभिषेक के लिए पंचामृत तैयार किया जाता है, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल शामिल होते हैं। भोग में माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाई चढ़ाई जाती है। पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व होता है।


लड्डू गोपाल की पूजा विधि


  • सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। पूजा स्थल को साफ करके सजाएं और भगवान कृष्ण के लिए झूला तैयार करें।


  • रात 12 बजे के आसपास लड्डू गोपाल को पहले गंगाजल और फिर पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाएं और मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और चंदन से श्रृंगार करें।


  • भगवान को झूले में बैठाकर झुलाएं और माखन-मिश्री, पंजीरी, फल व मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें और प्रसाद बांटकर व्रत खोलें।



जन्माष्टमी पर मंत्रों का जाप


  • कृं कृष्णाय नमः


  • ॐ क्लीं कृष्णाय नमः


  • गोकुल नाथाय नमः


  • ॐ नमो भगवते श्रीगोविन्दाय नमः


  • ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्