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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी: पूजा विधि और चंद्रोदय का समय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व आज देशभर में मनाया जा रहा है। भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। जानें चंद्रोदय का समय, पूजा विधि और प्रमुख शहरों में चंद्रदर्शन का समय। इस विशेष अवसर पर श्रद्धालु किस प्रकार से पूजा करते हैं, इसकी जानकारी भी प्राप्त करें।
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व


नई दिल्ली: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है। भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं और मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मनाते हैं। जन्माष्टमी के व्रत में चंद्रमा के दर्शन और उन्हें अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है, इसलिए व्रति चंद्रोदय का इंतजार करते हैं।


भगवान श्रीकृष्ण का जन्म

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र के संयोग में हुआ था। इसी कारण जन्माष्टमी की रात को निशिता काल में बाल गोपाल की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी है।


चंद्रोदय का समय

कितने बजे होगा चंद्रोदय?


पंडित वान्या आर्या के अनुसार, जन्माष्टमी की रात व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को चंद्रदर्शन का इंतजार रहता है। पंचांग के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन रात 11 बजकर 29 मिनट के आसपास होंगे। इसी समय भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की पूजा की जाएगी।


श्रीकृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त

श्रीकृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त


द्रिक पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण पूजा के लिए निशिता काल का शुभ समय रात 11 बजकर 57 मिनट से शुरू होकर 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु विधिपूर्वक भगवान कृष्ण की पूजा कर सकते हैं।


प्रमुख शहरों में चांद निकलने का समय

प्रमुख शहरों में चांद निकलने का समय


नई दिल्ली में रात 11 बजकर 25 मिनट पर चंद्रोदय होगा। मथुरा वृंदावन में रात 11 बजकर 33 मिनट, कोलकाता में रात 11 बजे, जयपुर में रात 11 बजकर 30 मिनट और चेन्नई में रात 11 बजकर 55 मिनट पर चंद्रदर्शन का समय है।


अहमदाबाद में रात 12 बजकर 05 मिनट, बेंगलुरु में रात 12 बजकर 06 मिनट, पुणे में रात 12 बजकर 10 मिनट, पटना में रात 10 बजकर 52 मिनट और लखनऊ व कानपुर में रात 11 बजकर 17 मिनट पर चांद निकलने की जानकारी है।


गुरुग्राम में रात 11 बजकर 24 मिनट, हैदराबाद में रात 11 बजकर 22 मिनट और मुंबई में रात 11 बजकर 40 मिनट पर चंद्रदर्शन का समय है।


जन्माष्टमी की पूजा विधि

जन्माष्टमी की रात कैसे करें कान्हा की पूजा?


जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है। श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दिनभर जलाहार या फलाहार कर सकते हैं। इस दौरान सात्विक भोजन और आचरण रखने की मान्यता है।


मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की धातु की प्रतिमा को एक पात्र में स्थापित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, शर्करा और घी से भगवान का अभिषेक करें। इसके बाद भगवान को साफ वस्त्र पहनाकर उन्हें झूले में विराजमान करें।