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सावन का महीना: कांवड़ यात्रा की शुरुआत और धार्मिक महत्व

सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हो रहा है, जिसमें कांवड़ यात्रा का आयोजन होगा। यह यात्रा 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के साथ समाप्त होगी। 3 से 11 अगस्त के बीच भक्तों की भीड़ सड़कों और मंदिरों में देखने को मिलेगी। कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्व अत्यधिक है, क्योंकि इसे भगवान शिव की पूजा से अधिक पुण्यदायक माना जाता है। जानें इस पवित्र यात्रा के बारे में और इसके पीछे की मान्यताएँ।
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सावन का पवित्र महीना और कांवड़ यात्रा

महादेव का प्रिय महीना सावन 30 जुलाई से आरंभ हो रहा है। जैसे ही सावन का महीना शुरू होगा, पवित्र कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी। इस वर्ष सावन की शुरुआत गुरुवार, 30 जुलाई से होगी, और यात्रा का समापन सावन शिवरात्रि के दिन, 11 अगस्त, मंगलवार को होगा। मुख्य रूप से कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगी, हालांकि कई स्थानों पर यह पूरे सावन भर चलती है.


विशेष दिन: 3 से 11 अगस्त

3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है, जबकि 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि है। इस दौरान सड़कों और मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलेगी। शिव भक्त 'हर हर महादेव' और 'बम बम भोले' के जयकारे लगाते हुए अपने घरों और मंदिरों की ओर बढ़ते हैं.


कांवड़ यात्रा का धार्मिक महत्व

कांवड़ यात्रा को अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान शिव की पूजा करने से प्राप्त पुण्य कांवड़ यात्रा से अधिक होता है। भक्त नंगे पांव या वाहनों से पवित्र नदियों का जल लाते हैं और इसे शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। कहा जाता है कि कांवड़ उठाने और जल चढ़ाने से भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं, भक्तों पर कृपा बनाए रखते हैं और मोक्ष के द्वार खोलते हैं.