सावन का महीना: शिवभक्तों के लिए आस्था और भक्ति का समय
सावन का महीना हिंदू धर्म में आस्था और भक्ति का विशेष समय है। इस दौरान भगवान शिव की पूजा का महत्व बढ़ जाता है। 2026 में सावन 30 जुलाई से शुरू होगा, जिसमें विशेष रूप से सावन के सोमवार की पूजा की जाती है। जानें इस महीने की तिथियां और इसके धार्मिक महत्व के बारे में।
| Jul 12, 2026, 16:25 IST
सावन का महत्व
हर साल शिवभक्त सावन के महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं। हिंदू धर्म में यह समय आस्था, भक्ति और साधना के लिए विशेष माना जाता है। भगवान शिव को श्रावण मास अत्यंत प्रिय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन समय में भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने शिवजी को पति के रूप में पाने के लिए वर्षों तक कठोर तप किया, जिसके फलस्वरूप उनकी इच्छा पूरी हुई। इसलिए सावन का महीना शिव और पार्वती के पवित्र मिलन और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस महीने में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। विशेषकर सावन के सोमवार का महत्व अधिक होता है, जब भक्त व्रत रखते हैं और विधिपूर्वक पूजा करते हैं, जिससे भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। आइए जानते हैं कि सावन का महीना कब से शुरू हो रहा है।
सावन 2026 की तिथियां
सावन 2026 कब से शुरू होगा?
साल 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई से शुरू होगा और यह 28 अगस्त तक चलेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह चातुर्मास का दूसरा महीना है, जो आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत शुभ माना जाता है। इस समय भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
सावन के सोमवार की तिथियां
-पहला सोमवार- 3 अगस्त,
-दूसरा सोमवार- 10 अगस्त,
-तीसरा सोमवार- 17 अगस्त
-चौथा सोमवार- 24 अगस्त 2026
इस दौरान शिवभक्त विशेष रूप से व्रत रखते हैं और मंदिरों में जाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
सावन माह का महत्व
सावन माह का महत्व
धार्मिक दृष्टिकोण से सावन सोमवार का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन पंचामृत से अभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव मंत्रों का जाप करने से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त होती है। यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, तो सावन में की गई पूजा-अर्चना अत्यंत फलदायी हो सकती है।
सावन के महीने में कांवड़ यात्रा का भी विशेष महत्व है। इस दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार, गंगोत्री जैसे पवित्र स्थलों से गंगाजल लाकर पैदल यात्रा करते हैं और शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और विश्वास का अनूठा उदाहरण भी प्रस्तुत करती है।
