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सावन शिवरात्रि 2026: पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

सावन शिवरात्रि 2026 का पर्व 10 अगस्त को मनाया जाएगा, जिसमें भक्त भगवान शिव की आराधना करेंगे। इस दिन कांवड़ यात्रा का समापन होगा और श्रद्धालु पवित्र जल अर्पित करेंगे। जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक मान्यताएं जो इस दिन के महत्व को बढ़ाती हैं।
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सावन शिवरात्रि 2026: एक पवित्र अवसर


सावन शिवरात्रि 2026: सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं, कांवड़ यात्रा करते हैं और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। इस वर्ष, सावन शिवरात्रि 10 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। इसी दिन कांवड़ यात्रा का समापन भी होगा, जब श्रद्धालु पवित्र जल भगवान शिव को अर्पित करेंगे। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 10 अगस्त को शाम 6:24 बजे प्रारंभ होगी और 11 अगस्त को दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार, सावन शिवरात्रि का पर्व 10 अगस्त को मनाया जाएगा। इस अवसर पर चारों पहर की पूजा और जलाभिषेक का विशेष महत्व है।


चारों पहर की पूजा का समय

सावन शिवरात्रि की रात भगवान शिव की चार प्रहर में पूजा करने की परंपरा है। प्रथम प्रहर की पूजा शाम 6:57 बजे से रात 9:44 बजे तक होगी। द्वितीय प्रहर रात 9:44 बजे से 12:31 बजे तक रहेगा। तृतीय प्रहर रात 12:31 बजे से सुबह 3:18 बजे तक और चतुर्थ प्रहर सुबह 3:18 बजे से 6:05 बजे तक रहेगा।


दिन के प्रमुख शुभ मुहूर्त

शिव पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:36 बजे से 5:20 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:50 बजे से 12:56 बजे तक होगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2:39 बजे से 3:41 बजे तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 6:57 बजे से 7:19 बजे तक और अमृत काल सुबह 9:33 बजे से 11:03 बजे तक रहेगा।


कांवड़ यात्रा का समापन

सावन शिवरात्रि के दिन कांवड़ यात्रा का समापन होता है। श्रद्धालु विभिन्न तीर्थों से लाया गया पवित्र जल शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और शिव पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।


धार्मिक मान्यता क्या कहती है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन शिवरात्रि पर भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सकारात्मक फल की प्राप्ति होती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, रुद्राभिषेक करते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं। शिव भक्ति का यह पर्व पूरे सावन महीने के सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में गिना जाता है।


पंचांग के अनुसार तिथि

पंचांग के अनुसार, कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 10 अगस्त की शाम 6:24 बजे से शुरू होकर 11 अगस्त की दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। इसी आधार पर 10 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जाएगी। श्रद्धालु निर्धारित मुहूर्त में जलाभिषेक और चारों पहर की पूजा कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।