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हरितालिका तीज 2023: विशेष संयोग और व्रत की विधि

हरितालिका तीज 2023 का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा, जिसमें विशेष ग्रह संयोग बन रहा है। जानें इस पर्व का महत्व, व्रत के नियम और पूजा विधि। इस अवसर पर भगवान शिव, पार्वती और गणेश जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए क्या करना चाहिए, यह जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
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हरितालिका तीज का महापर्व


हरितालिका तीज, जो अखंड सौभाग्य और योग्य वर की प्राप्ति का पर्व है, इस वर्ष 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस बार ग्रहों और तिथियों का अद्भुत संयोग बन रहा है, जो पिछले 7 वर्षों में नहीं देखा गया। सोमवार, जो भगवान शिव को समर्पित है, इस दिन तृतीया और चतुर्थी का विशेष योग भी बन रहा है। इससे व्रत करने वालों को शिव-पार्वती के साथ भगवान गणेश का आशीर्वाद भी प्राप्त होगा।


शुभ मुहूर्त और तिथि का महत्व

शास्त्रों के अनुसार, चतुर्थी युक्त तृतीया तिथि इस व्रत के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। 14 सितंबर को तृतीया तिथि सुबह 7:19 बजे तक रहेगी, जिसके बाद चतुर्थी तिथि का आरंभ होगा। इस कारण, सोमवार को गणेश चतुर्थी के साथ व्रत का पालन करना ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत लाभकारी माना जा रहा है।


व्रत के कड़े नियम

हरितालिका तीज का व्रत बहुत कठिन होता है। यह उपवास पूरी तरह से निर्जला और निराहार रखा जाता है। हालांकि, जो महिलाएं अस्वस्थ हैं या शारीरिक रूप से अक्षम हैं, वे आवश्यकता अनुसार जल का सेवन कर सकती हैं। इस व्रत का एक महत्वपूर्ण नियम यह है कि व्रती को रात में सोने की अनुमति नहीं होती, बल्कि पूरी रात जागरण करना अनिवार्य होता है।


प्रदोष काल की सही पूजा विधि

इस व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल में की जाती है। शाम को स्नान के बाद, चौकी पर मंडप सजाकर शिव-पार्वती और गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित करें। इसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य से पूजन करें और माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करें। रात भर भजन-कीर्तन करके जागरण करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।