इलेक्ट्रिक बनाम CNG: क्या सच में EV प्रदूषण कम करती है?
इलेक्ट्रिक कारों का पर्यावरणीय प्रभाव
सड़क पर चुपचाप चलने वाली इलेक्ट्रिक कारें प्रदूषण के खिलाफ एक प्रभावी उपाय मानी जाती हैं। लेकिन क्या यह पूरी सच्चाई है? द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (TERI) द्वारा किए गए एक नए अध्ययन ने इस धारणा को चुनौती दी है। इस अध्ययन के अनुसार, भारत के वर्तमान ऊर्जा मिश्रण में CNG वाहन अपने जीवनचक्र के दौरान इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में कम पर्यावरणीय प्रभाव डाल सकते हैं।
बढ़ते प्रदूषण के मुद्दे को देखते हुए, सरकार इलेक्ट्रिक और CNG दोनों प्रकार के वाहनों को प्रोत्साहित कर रही है, और इनकी संख्या सड़कों पर लगातार बढ़ रही है। यह अध्ययन वेल टू व्हील विश्लेषण पर आधारित है, जिसमें केवल कार के धुएं को नहीं, बल्कि ईंधन या बिजली के उत्पादन से लेकर गाड़ी चलाने तक के कुल उत्सर्जन को शामिल किया गया है।
इलेक्ट्रिक कारों की बिजली का स्रोत
बिजली कहां से आती है?
इलेक्ट्रिक कारें चलते समय कोई धुआं नहीं छोड़तीं, जो उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। लेकिन उन्हें चार्ज करने वाली बिजली का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कोयले से चलने वाले बिजलीघरों से आता है। देश का ग्रिड पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भर नहीं है, जिससे बिजली उत्पादन के दौरान भी कार्बन उत्सर्जन होता है। इस कारण, वर्तमान में EV का कुल उत्सर्जन अपेक्षा से अधिक हो सकता है।
CNG का पर्यावरणीय लाभ
CNG क्यों रही आगे?
अध्ययन में CNG के निर्माण, उसके कार तक पहुंचने और फिर उपयोग तक की पूरी प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया। EV के लिए चार्जिंग में उपयोग होने वाली बिजली का भी इसी तरह से मूल्यांकन किया गया। CNG, पेट्रोल और डीजल की तरह जीवाश्म ईंधन है, लेकिन यह प्रदूषण कम करती है। पूरे सफर का मूल्यांकन करने पर, वर्तमान में CNG का पर्यावरण पर प्रभाव कम पाया गया।
बैटरी की चुनौतियाँ
बैटरी की बड़ी चुनौती
इलेक्ट्रिक कारों की भारी बैटरी बनाने में लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे खनिजों की आवश्यकता होती है। इन्हें निकालने और बैटरी बनाने में काफी ऊर्जा लगती है। पुरानी बैटरी का निपटान भी आसान नहीं है और इसे सही तरीके से रीसाइकिल करना आवश्यक है। भविष्य में EV की संख्या बढ़ने पर यह एक बड़ी समस्या बन सकती है। CNG वाहनों में ऐसी बैटरी नहीं होती, इसलिए यह समस्या वहां नहीं आती।
क्या इलेक्ट्रिक वाहन खराब हैं?
तो क्या EV खराब है?
बिल्कुल नहीं। असली मुद्दा बिजली के स्रोत का है। यदि सौर, पवन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों से बिजली उत्पादन बढ़ता है, तो EV का कुल प्रदूषण भी कम होगा और यह एक बेहतर विकल्प बन सकती है। इसका मतलब है कि EV की हरितता केवल कार पर निर्भर नहीं करती, बल्कि चार्जिंग के लिए उपयोग की जाने वाली बिजली पर भी निर्भर करती है। इस दृष्टिकोण से, CNG और CNG हाइब्रिड को इलेक्ट्रिक गतिशीलता की ओर बढ़ने के बीच एक अंतरिम विकल्प माना जा सकता है।
