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पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण पर सरकार का स्पष्ट बयान

केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण की सीमा को बढ़ाने की सभी अफवाहों को खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्री ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी बदलाव के लिए ठोस रिसर्च की आवश्यकता होगी। एथेनॉल मिश्रण की प्रक्रिया एक लंबी यात्रा रही है, जो 1.53% से शुरू होकर अब 20% तक पहुंच चुकी है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
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सरकार ने अफवाहों पर लगाई रोक

नई दिल्ली: पेट्रोल में 20% से अधिक एथेनॉल मिलाने की अटकलों और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को केंद्र सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिसे 'E20 फ्यूल' के नाम से जाना जाता है, और इस सीमा को बढ़ाने का कोई विचार नहीं है। हाल ही में ऐसी चर्चाएं चल रही थीं कि एथेनॉल की मात्रा को 22%, 25% या 30% तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन अब राज्यसभा में इन सभी दावों को सिरे से नकार दिया गया है।


भविष्य में बदलाव के लिए गहन रिसर्च आवश्यक

राज्यसभा में इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि भविष्य में एथेनॉल मिश्रण को 20% से अधिक बढ़ाने पर विचार केवल ठोस रिसर्च के बाद ही किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई भी बड़ा कदम वैज्ञानिक परीक्षणों और तकनीकी अध्ययनों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल निर्माताओं, तेल कंपनियों और प्रमुख रिसर्च संस्थानों के साथ गहन विचार-विमर्श के बाद ही उठाया जाएगा। इस समय पेट्रोल पंपों पर मिश्रण का स्तर जस का तस बना रहेगा।


एथेनॉल ब्लेंडिंग का सफर

संसद में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, भारत में पेट्रोल के साथ एथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया एक रात में नहीं हुई, बल्कि यह एक लंबी और चरणबद्ध प्रक्रिया रही है। इसकी शुरुआत 2013-14 में हुई थी, जब पेट्रोल में औसत एथेनॉल मिश्रण केवल 1.53 प्रतिशत था। इसके बाद सरकार की नीतियों और प्रयासों के चलते यह आंकड़ा 2021-22 में 10 प्रतिशत तक पहुंच गया।


लक्ष्य की प्राप्ति

एथेनॉल ब्लेंडिंग की यह प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ती रही। 2023-24 में एथेनॉल मिश्रण का स्तर 14.6 प्रतिशत और 2024-25 में 19.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। इसके बाद सरकार ने अपनी योजना के अनुसार 2025-26 के नवंबर से जून के बीच पेट्रोल में 20 प्रतिशत यानी E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है। यह उपलब्धि देश की ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।