प्याज की कीमतों में भारी वृद्धि: थोक दरों में 135% का उछाल
प्याज की कीमतों में उछाल
नई दिल्ली: देशभर में किचन का बजट एक बार फिर से बिगड़ गया है, और प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों को परेशान कर दिया है। पिछले वर्ष की तुलना में प्याज की खुदरा कीमतों में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है। सरकारी उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्याज की कीमतों में थोक मंडियों के साथ-साथ खुदरा बाजार में भी तेजी देखी जा रही है। 21 सितंबर को मंडियों में प्याज का थोक मूल्य 4615.98 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 3299.85 रुपये प्रति क्विंटल था। इस प्रकार, थोक कीमतों में लगभग 135 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
महानगरों में प्याज की कीमतें
महानगरों में प्याज की कीमतें 60 रुपये के करीब पहुंचीं
लगभग 10 महीनों तक स्थिर रहने के बाद, पिछले दो महीनों से प्याज की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, एक महीने पहले प्याज की राष्ट्रीय औसत कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो थी, जो 21 सितंबर को बढ़कर 54.23 रुपये प्रति किलो हो गई। दिल्ली में, एक साल पहले 32 रुपये किलो बिकने वाला प्याज अब 53 रुपये पर पहुंच गया है। इसी तरह, मुंबई में कीमत 30 रुपये से बढ़कर 58 रुपये, चेन्नई में 30 से 60 रुपये और रांची में 25 रुपये से बढ़कर 57 रुपये प्रति किलो हो गई है।
महंगाई के कारण
बेमौसम बारिश और स्टॉक का नुकसान बनी महंगाई की मुख्य वजह
प्याज की कीमतों में इस वृद्धि के पीछे उत्पादन और भंडारण से जुड़े कई कारण हैं। महाराष्ट्र में गर्मियों की प्याज की फसल को मार्च में हुई बेमौसम बारिश से भारी नुकसान हुआ था। इसके अलावा, केंद्रीय एजेंसियों के सुरक्षित बफर स्टॉक में लगभग 30 प्रतिशत प्याज सड़ने या खराब होने की सूचना है। हालांकि, विदेशी बाजारों में भारतीय प्याज की मांग कमजोर बनी हुई है, और बांग्लादेश में उत्पादन बढ़ने से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है।
भविष्य की संभावनाएं
बीज कंपनियों की मांग खत्म होते ही गिरेंगे दाम, कब तक मिलेगी राहत?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सप्ताह से प्याज के दामों में स्थिरता आई है और फिलहाल बड़ी तेजी की संभावना कम है। मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की मांग मुख्य रूप से बीज कंपनियों से आ रही है। जानकारों का मानना है कि जैसे ही बीज कंपनियों की थोक खरीद प्रक्रिया समाप्त होगी, प्याज के दामों में प्रति किलो 5 से 10 रुपये तक की कमी देखने को मिल सकती है।
आपूर्ति और फसल चक्र
फसल चक्र और आवक पर टिकी कीमतें, नई फसल से उम्मीद
प्याज की कीमतों में साल के कुछ महीनों में आने वाला यह उछाल सीधे तौर पर इसके फसल चक्र और मंडी आवक से संबंधित है। रबी सीजन की प्याज मार्च-अप्रैल में मंडियों में आती है, जिसे भंडारित किया जाता है। खरीफ की नई फसल आने तक देशभर की आपूर्ति इसी पुराने स्टॉक पर निर्भर करती है। अगस्त से जनवरी के बीच जब रबी का पुराना स्टॉक तेजी से घटने लगता है, तब मंडियों में आवक कमजोर पड़ने से मांग और आपूर्ति का अंतर बढ़ जाता है। हालांकि, आने वाले हफ्तों में खरीफ सीजन की नई आवक शुरू होते ही प्याज की कीमतों में गिरावट और आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
