बुरहानपुर के केले को मिला जीआई टैग, किसानों के लिए नई उम्मीद
बुरहानपुर के केले की नई पहचान
भोपाल/नई दिल्ली: बुरहानपुर के प्रसिद्ध केले को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ है, जो मिठास और गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। यह उपलब्धि यहां के हजारों केला किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।
इस जीआई टैग के लिए खकनार कृषि विकास फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड ने जनवरी 2024 में आवेदन किया था। बुरहानपुर मध्य प्रदेश में केला उत्पादन का सबसे बड़ा जिला है, और यहां प्रदेश की एकमात्र केला मंडी भी स्थित है, जिससे यह क्षेत्र केले के व्यापार का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
जिले में फैले हजारों बागान हर साल बड़ी मात्रा में केले का उत्पादन करते हैं। यहां के केले अपनी विशेष मिठास, स्वाद और गुणवत्ता के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध हैं, विशेषकर उत्तर भारत में इनकी मांग अधिक है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में भी बुरहानपुर के केले की निरंतर मांग बनी हुई है।
जीआई टैग मिलने के बाद बुरहानपुर के केले को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग पहचान मिलेगी। इससे उत्पाद की ब्रांड वैल्यू में वृद्धि होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना है। साथ ही, नकली और मिलते-जुलते उत्पादों से इस विशेष किस्म की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
बुरहानपुर जिले में लगभग 18,640 किसान केला खेती से जुड़े हुए हैं, जो लगभग 26,120 हेक्टेयर भूमि पर केले की खेती करते हैं। इस विशाल क्षेत्र से हर साल करीब 18,28,400 मीट्रिक टन केले का उत्पादन होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद निर्यात के नए अवसर खुलेंगे, जिससे व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कृषि आधारित उद्योगों और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को भी इसका लाभ मिलेगा।
बुरहानपुर में पहले से ही केला आधारित प्रसंस्करण उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत यहां 55 से अधिक केला प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं, जहां केले से विभिन्न प्रकार के मूल्यवर्धित उत्पाद और स्नैक्स तैयार किए जाते हैं।
जीआई टैग मिलने के बाद इन उत्पादों की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय उद्योगों को नई गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और बुरहानपुर के केले की मिठास दुनिया के और अधिक देशों तक पहुंचेगी।
