भारत की नौसेना को मिले तीन नए स्वदेशी युद्धपोत, पीएम मोदी करेंगे शामिल
भारत की नौसेना की नई ताकत
नई दिल्ली: वैश्विक सुरक्षा के बदलते परिदृश्य और समुद्री चुनौतियों के मद्देनजर, भारत अपनी नौसैनिक क्षमताओं को सशक्त बनाने में जुटा हुआ है। भारतीय सेना और वायुसेना के साथ-साथ, नौसेना को भी अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों और प्लेटफार्मों से लैस किया जा रहा है। इसी क्रम में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को कोलकाता में भारतीय नौसेना के तीन स्वदेशी प्लेटफार्मों—INS दुनागिरि, INS संशोधक और INS अग्रय—को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल करेंगे।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह समारोह भारत की समुद्री सैन्य क्षमता, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। ये तीनों पोत कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) में निर्मित किए गए हैं और भारतीय नौसेना की विभिन्न परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए गए हैं।
INS दुनागिरि एक अत्याधुनिक स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है, जो दुश्मन के रडार से बचते हुए लंबी दूरी तक प्रभावी कार्रवाई करने में सक्षम है। वहीं, INS संशोधक एक आधुनिक सर्वेक्षण पोत है, जिसका उपयोग समुद्री मानचित्रण और रणनीतिक सर्वेक्षण कार्यों में किया जाएगा। INS अग्रय को विशेष रूप से तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए विकसित किया गया है।
नौसेना का मानना है कि इन तीनों प्लेटफार्मों के एक साथ शामिल होने से उसकी युद्धक क्षमता, समुद्री सर्वेक्षण तंत्र और तटीय सुरक्षा व्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी।
भारत वर्तमान में INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य जैसे दो विमानवाहक पोतों का संचालन कर रहा है। आने वाले वर्षों में भारतीय नौसेना का लक्ष्य अपनी समुद्री ताकत को और विस्तार देते हुए ‘ब्लू वाटर नेवी’ की अवधारणा को और अधिक मजबूत करना है, ताकि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति और प्रभाव को बढ़ाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी देश के लिए मजबूत नौसैनिक शक्ति बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में भारतीय नौसेना में इन तीन स्वदेशी प्लेटफार्मों का शामिल होना देश की रक्षा तैयारियों को नई मजबूती प्रदान करेगा।
