भारत में 15 विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खोलने की मंजूरी
केंद्र सरकार ने दी मंजूरी, लेटर ऑफ इंटेंट जारी
केंद्र सरकार ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इस संबंध में विश्वविद्यालयों को लेटर ऑफ इंटेंट भी जारी किया गया है। इस निर्णय से भारतीय छात्रों को विदेश जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, और वे घर पर ही विदेशी डिग्री प्राप्त कर सकेंगे, जिससे पढ़ाई का खर्च 30-40% तक कम होगा।
विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस की पढ़ाई
विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई, परीक्षा और डिग्री पूरी तरह से होम कैंपस के मानकों के अनुसार होगी। पहले चरण में एआईए कंप्यूटर साइंस और एसटीईएम विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह कदम छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार करेगा। छात्रों को ग्लोबल डिग्री, अंतरराष्ट्रीय फैकल्टी और बेहतर करियर के अवसर मिलेंगे।
शुरुआत में हर कैंपस में 200 से 250 छात्रों को मिलेगा दाखिला
प्रारंभ में, हर कैंपस में 200 से 250 छात्रों को दाखिला दिया जाएगा, और अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर हर कैंपस में सालाना 1,000 से 1,200 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य है। मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों में यूनिवर्सिटी ऑफ एबरडीन, ब्रिस्टल, यॉर्क, इलिनोइस टेक, लिवरपूल और विक्टोरिया यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान अपने कैंपस खोल रहे हैं। मौजूदा सत्र के लिए 10,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं।
स्कॉलरशिप भी मिलेगी, 1,000 करोड़ रुपये का फंड किया निर्धारित
अगले पांच वर्षों के लिए लगभग 1,000 करोड़ रुपये का फंड स्कॉलरशिप के लिए निर्धारित किया गया है। योग्यता और आवश्यकता के अनुसार 10% से 100% तक स्कॉलरशिप उपलब्ध होगी। एबरडीन 2 लाख और ब्रिस्टल 10 लाख रुपये सालाना तक स्कॉलरशिप देने का प्रावधान रखता है।
एडमिशन के लिए शैक्षणिक योग्यता
एडमिशन के लिए 12वीं कक्षा में कम से कम 75% और ग्रेजुएशन में 55% से 70% अंक होना आवश्यक है। यदि बोर्ड परीक्षा में अंग्रेजी में 70% से 85% अंक प्राप्त किए गए हैं, तो आईईएलटीएस देने की आवश्यकता नहीं होगी। इस तरह की शैक्षणिक योग्यता से छात्रों को प्रवेश पाने का अवसर मिलेगा।
