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भारत में डेंगू से बचाव के लिए नई वैक्सीन क्यूडेंगा की तैयारी

भारत में डेंगू से बचाव के लिए एक नई वैक्सीन क्यूडेंगा जल्द ही उपलब्ध हो सकती है। जापान की Takeda Pharmaceutical Company द्वारा विकसित इस वैक्सीन की दो डोज दी जाती हैं और यह चारों प्रकार के डेंगू वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है। इसकी प्रभावशीलता क्लिनिकल ट्रायल में 80.2 प्रतिशत तक दर्ज की गई है। जानें कब तक यह वैक्सीन भारतीय बाजार में उपलब्ध होगी और इसके उपयोग की विशेषताएँ क्या हैं।
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डेंगू से सुरक्षा के लिए नया विकल्प

भारत में डेंगू से बचाव के लिए एक नई वैक्सीन जल्द ही उपलब्ध हो सकती है। जापान की Takeda Pharmaceutical Company द्वारा विकसित क्यूडेंगा वैक्सीन को भारतीय बाजार में लाने की प्रक्रिया चल रही है। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और टेकेडा के बीच इस वैक्सीन के प्रचार और वितरण के लिए एक समझौता हुआ है। इसके नियामकीय अनुमोदन के बाद, इसे 2027 की पहली छमाही में उपलब्ध होने की उम्मीद है।


क्यूडेंगा वैक्सीन की विशेषताएँ

क्यूडेंगा वैक्सीन चारों प्रकार के डेंगू वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई गई है। यह 4 से 60 वर्ष की आयु के बच्चों और वयस्कों के लिए उपयुक्त है। इस वैक्सीन की दो डोज दी जाती हैं, प्रत्येक 0.5 मिलीलीटर की होती है, और दूसरी डोज पहली के तीन महीने बाद दी जाती है। खास बात यह है कि वैक्सीनेशन से पहले किसी पुराने डेंगू संक्रमण की जांच की आवश्यकता नहीं होती।


क्यूडेंगा की प्रभावशीलता

क्लिनिकल ट्रायल के परिणामों के अनुसार, क्यूडेंगा ने डेंगू संक्रमण से बचाव में प्रभावी साबित किया है। दूसरी डोज के एक साल बाद इसकी प्रभावशीलता 80.2 प्रतिशत रही, जबकि 18 महीने बाद अस्पताल में भर्ती होने के मामलों के खिलाफ इसकी प्रभावशीलता 90.4 प्रतिशत दर्ज की गई।


भारत में उपलब्धता

भारत के ड्रग रेगुलेटर ने जुलाई 2026 में क्यूडेंगा को मंजूरी दी थी। इसके बाद डॉ. रेड्डीज और टेकेडा के बीच समझौते के चलते इसके प्रचार और वितरण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। बाजार में इसकी उपलब्धता अंतिम नियामकीय और मार्केट अथॉराइजेशन प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।


डेंगू से बचाव का महत्व

नेशनल सेंटर फॉर वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल के अनुसार, 2025 में भारत में डेंगू के 1,13,450 मामले सामने आए और 95 लोगों की मृत्यु हुई। मानसून के दौरान पानी जमा होने से एडीज मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण बनता है। वैक्सीन एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय हो सकती है, लेकिन पानी जमा होने से रोकना और मच्छरों से बचाव भी आवश्यक है। टेकेडा 2030 तक सालाना 10 करोड़ डोज का उत्पादन करने की योजना बना रही है।