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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, अमेरिका-ईरान तनाव का असर

गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार अमेरिका-ईरान तनाव के चलते गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 340 और 114 अंक की कमी आई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे बाजार पर असर पड़ सकता है। जानें और क्या है बाजार की स्थिति और निवेशकों की धारणा।
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भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, अमेरिका-ईरान तनाव का असर

भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत

मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ खुला। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्क बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 में 0.40 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई। 30 शेयरों वाला सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 73,983.18 से 367.19 अंक गिरकर 73,615.99 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 23,214.95 से 110.55 अंक गिरकर 23,104.40 पर खुला।


शुरुआती कारोबार में गिरावट

शुरुआती कारोबार के दौरान, सेंसेक्स 340.39 अंक या 0.46 प्रतिशत गिरकर 73,642.79 पर ट्रेड कर रहा था, वहीं निफ्टी 50 114.45 अंक या 0.49 प्रतिशत गिरकर 23,100.50 पर था। व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 0.61 प्रतिशत और 0.62 प्रतिशत की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।


सेक्टरवार प्रदर्शन

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी आईटी में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जो कि सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल, निफ्टी ऑटो और निफ्टी केमिकल में भी बड़ी गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर ने बेहतर प्रदर्शन किया।


निवेशकों की धारणा

निफ्टी 50 इंडेक्स में एचसीएलटेक, इंफोसिस, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टीसीएस, आयशर मोटर, इटरनल और हिंडाल्को के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में हालिया तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।


ऊर्जा कीमतों का प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा कीमतों में वृद्धि से वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, जिससे ब्याज दरों और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है। इसी अनिश्चितता के कारण वैश्विक शेयर बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ी है।


आरबीआई और सरकार के कदम

विश्लेषकों का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और सरकार द्वारा हाल में उठाए गए कदमों से रुपए को कुछ हद तक स्थिरता मिली है। हालांकि, वैश्विक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों के निवेश प्रवाह को लेकर बनी अनिश्चितता निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है।


अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति

इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया है कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई ठिकानों पर अतिरिक्त हमले किए हैं, जो ईरान की आक्रामक गतिविधियों के जवाब में किए गए हैं।


कमोडिटी बाजार में गतिविधियाँ

कमोडिटी बाजार में, अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 2.54 प्रतिशत बढ़कर 95.47 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 93.64 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है।


एशियाई बाजारों की स्थिति

एशियाई बाजारों में भी निवेशकों की धारणा कमजोर रही। हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1 प्रतिशत तक गिर गए, जबकि जापान का निक्केई सूचकांक लगभग सपाट कारोबार करता रहा। अमेरिकी शेयर बाजारों की बात करें, तो बुधवार रात वॉल स्ट्रीट भी कमजोरी के साथ बंद हुआ। एसएंडपी 500 सूचकांक 1.62 प्रतिशत गिरा, जबकि नैस्डैक में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।