भारतीय शेयर बाजार में गिरावट, आईटी सेक्टर पर भारी दबाव
शेयर बाजार में बिकवाली का माहौल
विदेशों से मिले नकारात्मक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण बुधवार को घरेलू शेयर बाजारों में बिकवाली का सामना करना पड़ा, जिसमें आईटी क्षेत्र में सबसे अधिक गिरावट देखी गई।
यह लगातार तीसरी बार है जब प्रमुख सूचकांकों में गिरावट आई है। बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 361 अंक गिरकर 75,216 अंक पर खुला और पूरे दिन लाल निशान में रहा। अंत में, सेंसेक्स 813.35 अंक (1.08 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 74,764.23 अंक पर बंद हुआ।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक भी 203.60 अंक यानी 0.86 प्रतिशत गिरकर 23,431.50 अंक पर आ गया। यह इस साल 11 जून के बाद का सबसे निचला स्तर है।
अमेरिकी शेयर बाजारों में मंगलवार को आई गिरावट का असर आज भारतीय बाजारों में भी देखने को मिला, विशेषकर आईटी कंपनियों में।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि और रुपये की गिरावट ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया है। लंदन का ब्रेंट क्रूड वायदा 2.5 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।
घरेलू स्तर पर, निफ्टी आईटी सूचकांक में 3.24 प्रतिशत की गिरावट आई। रियल्टी और वित्तीय समूहों में क्रमशः 2.23 प्रतिशत और 1.24 प्रतिशत की कमी आई। धातु समूह में 1.79 प्रतिशत की वृद्धि को छोड़कर, अन्य सभी सूचकांक लाल निशान में रहे।
एनएसई में 3,676 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ, जिनमें से 2,092 के शेयर नीचे और 1,481 के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 24 के शेयर नुकसान में बंद हुए। एचसीएल टेक्नोलॉजीज का शेयर 4.55 प्रतिशत गिर गया, जबकि इंफोसिस और टेक महिंद्रा के शेयरों में भी गिरावट आई।
हालांकि, अडानी पोर्ट्स में 3.67 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई।
वैश्विक बाजारों का प्रभाव
वैश्विक स्तर पर, एशिया में जापान का निक्केई 0.19 प्रतिशत और हांगकांग का हैंगसेंग 0.17 प्रतिशत गिर गया। चीन का शंघाई कंपोजिट 0.28 प्रतिशत की बढ़त में रहा।
यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में जर्मनी का डैक्स 1.49 प्रतिशत और ब्रिटेन का एफटीएसई 1.02 प्रतिशत की गिरावट में था।
