लुचा लिब्रे: फुटबॉल विश्व कप में मेक्सिको की सांस्कृतिक धरोहर का जादू
लुचा लिब्रे का आकर्षण
फुटबॉल के साथ मेक्सिको की प्रसिद्ध लुचा लिब्रे (मुखौटा कुश्ती) भी विश्व कप के दौरान पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गई है।
रंग-बिरंगे मुखौटे पहने पहलवानों से भरी सड़कों और भरे हुए अखाड़ों ने इस पारंपरिक खेल की लोकप्रियता को दर्शाया है। फुटबॉल प्रेमी मेक्सिको की इस सांस्कृतिक धरोहर का आनंद लेते हुए नजर आ रहे हैं।
लुचा लिब्रे मेक्सिको की राष्ट्रीय पहचान और जुनून का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। कुश्ती के अखाड़ों में दर्शक कुछ समय के लिए फुटबॉल विश्व कप का रोमांच भूलकर एक अलग दुनिया में खो जाते हैं।
ग्वाडलाहारा में स्पेन और उरुग्वे के बीच मैच के दौरान हजारों दर्शक एरेना मेक्सिको में मिस्टिको और मास्कारा दोरादा की जोड़ी तथा द बीस्ट मोर्टोस और सैमी ग्वेरा के बीच मुकाबले का आनंद ले रहे थे। एरेना मेक्सिको को लुचा लिब्रे का 'कैथेड्रल' कहा जाता है।
इंग्लैंड के मैनचेस्टर के एंडी विंस्टन ने कहा कि यह अनुभव अद्भुत रहा। मेक्सिको आकर लुचा लिब्रे देखना अनिवार्य है। यह यहां की महान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।
दर्शक दीर्घा में इंग्लैंड, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, कोलंबिया, स्पेन और मेक्सिको के प्रशंसक अपने पसंदीदा पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए दिखाई दिए।
ब्राजील के हेनरिक नूनेस दोस सैंटोस ने कहा कि यह रात मेरी कल्पना से कहीं बेहतर थी। यहां का रोमांच इतना जीवंत है कि सब कुछ वास्तविक लगता है।
मेक्सिकन लुचा लिब्रे की शुरुआत 20वीं सदी के प्रारंभ में हुई थी। इसकी शैली में अमेरिकी कुश्ती और ग्रीको-रोमन कुश्ती की तकनीकों का अनूठा संगम देखने को मिलता है। इसे 2018 में मेक्सिको सिटी की सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया गया।
मुखौटे की आड़ में पहलवान अपनी असली पहचान छुपाते हैं और राष्ट्रीय प्रतीक का रूप लेते हैं। यही कारण है कि अधिकांश पहलवान अपने असली नाम सार्वजनिक नहीं करते।
तीस वर्षीय पहलवान स्टार ब्लैक ने कहा कि लुचा लिब्रे ही मेरा जीवन है। मैंने अपने दादा-दादी के साथ मुखौटे बेचे और धीरे-धीरे इस खेल के प्रति प्रेम विकसित किया।
लुचा लिब्रे पहले से ही पर्यटकों के बीच लोकप्रिय थी, लेकिन विश्व कप ने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। अब मुखौटे और कुश्ती की झलक केवल अखाड़ों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सड़कों और स्टेडियमों के आसपास भी दिखाई देने लगी है।
मेक्सिको के राष्ट्रीय स्वायत्त विश्वविद्यालय के लुचा लिब्रे विशेषज्ञ जोस एंजेल गार्फियास फ्रियास के अनुसार, अन्य मेजबान देशों की तुलना में कम खर्च के कारण विदेशी पर्यटक मेक्सिको में ठहर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले भी लुचा लिब्रे लोकप्रिय थी, लेकिन विश्व कप के दौरान अखाड़े पहले से कहीं अधिक भरे हुए हैं। विदेशी पर्यटक अपनी-अपनी राष्ट्रीय टीमों की जर्सी पहनकर मुकाबले देखने पहुंच रहे हैं।
स्टेडियमों के बाहर अब राष्ट्रीय झंडों के साथ-साथ लुचा लिब्रे के मुखौटे भी बड़ी संख्या में बिकते दिखाई देते हैं। हालांकि फीफा के सुरक्षा नियमों के तहत स्टेडियमों के भीतर मुखौटे पहनने की अनुमति नहीं है, फिर भी कुछ प्रशंसक इन्हें पहनकर अंदर जाते देखे गए।
